Loading data... On slow networks this could take a few minutes.
100%

पुरस्कृता वर्त्मनि पार्थिवेन
प्रत्युद्गता पार्थिवधर्मपत्न्या ।
तदन्तरे सा विरराज धेनु-
र्दिनक्षपामध्यगतेव संध्या ॥

अन्वयः AI वर्त्मनि पार्थिवेन पुरस्कृता, पार्थिवधर्मपत्न्या प्रत्युद्गता सा धेनुः, तत् अन्तरे दिनक्षपामध्यगता संध्या इव विरराज।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) पुरस्कृतेति॥ वर्त्मनि पार्थिवेन पृथिव्या ईश्वरेण। तस्येश्वरः (अष्टाध्यायी ५.१.४२ ) इत्यञ्प्रत्ययः। पुरस्कृताऽग्रतः कृता। धर्मस्य पत्नी धर्मपत्नी। धर्मार्थपत्नीत्यर्थः। अश्वघासादिवत्तादर्थ्ये षष्ठीसमासः। पार्थिवस्य धर्मपत्न्या सा धेनुस्तदन्तरे तयोर्दंपत्योर्मध्ये। दिनक्षपयोर्दिनरात्र्योर्मध्यगता संध्येव। रराज॥
Summary AI Escorted on the path by the king and received by the king's lawful wife, the cow shone between them, just as the twilight shines between day and night.
सारांश AI मार्ग में राजा द्वारा आगे की गई और रानी द्वारा अगवानी की गई वह गाय उन दोनों के मध्य में वैसी ही सुशोभित हुई, जैसे दिन और रात के बीच संध्या सुशोभित होती है।
पदच्छेदः AI
पुरस्कृतापुरस्कृत (पुरस्√कृ+क्त+टाप्, १.१) escorted
वर्त्मनिवर्त्मन् (७.१) on the path
पार्थिवेनपार्थिव (३.१) by the king
प्रत्युद्गताप्रत्युद्गत (प्रति+उत्√गम्+क्त+टाप्, १.१) received
पार्थिवधर्मपत्न्यापार्थिवधर्मपत्नी (३.१) by the king's lawful wife
तत्तद् that
अन्तरेअन्तर (७.१) between them
सातद् (१.१) she
विरराजविरराज (वि√राज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) shone
धेनुःधेनु (१.१) the cow
दिनक्षपामध्यगतादिनक्षपामध्यगत (१.१) that is between day and night
इवइव like
संध्यासंध्या (१.१) the twilight
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
पु स्कृ ता र्त्म नि पा र्थि वे
प्र त्यु द्ग ता पा र्थि र्म त्न्या
न्त रे सा वि रा धे नु
र्दि क्ष पा ध्य ते सं ध्या
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.