अन्येद्युरात्मानुचरस्य भावं
जिज्ञासमाना मुनिहोमधेनुः ।
गङ्गाप्रपातान्तविरूढशष्पं
गौरीगुरोर्गह्वरमाविवेश ॥
अन्येद्युरात्मानुचरस्य भावं
जिज्ञासमाना मुनिहोमधेनुः ।
गङ्गाप्रपातान्तविरूढशष्पं
गौरीगुरोर्गह्वरमाविवेश ॥
जिज्ञासमाना मुनिहोमधेनुः ।
गङ्गाप्रपातान्तविरूढशष्पं
गौरीगुरोर्गह्वरमाविवेश ॥
अन्वयः
AI
अन्येद्युः मुनि-होम-धेनुः आत्म-अनुचरस्य भावम् जिज्ञासमाना गौरी-गुरोः गङ्गा-प्रपात-अन्त-विरूढ-शष्पम् गह्वरम् आविवेश।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अन्येद्युरिति॥ अन्येद्युरन्यस्मिन्दिने द्वाविंशे दिने।
सद्यः परुत्परारि- (अष्टाध्यायी ५.३.२२ ) इत्यादिना निपातनादव्ययम्। अद्यात्राह्लाय पूर्वेऽह्रीत्यादौ पूर्वोत्तरापरात् । तथाधरान्यान्यतरेतरात्पूर्वेंद्युरादयः ॥ इत्यमरः। मुनिहोमधेनुः आत्मानुचरस्य भावमभिप्रायं दृढभक्तित्वम्। भावोऽभिप्राय आशयः इति यादवः। जिज्ञासमाना ज्ञातुमिच्छन्ती। ज्ञाश्रुस्मृदृशां सनः (अष्टाध्यायी १.३.५७ ) इत्यात्मनेपदे शानच्। प्रपतत्यस्मिन्निति प्रपातः पतनप्रदेशः गङ्गायाः प्रपातस्तस्यान्ते समीपे विरूढानि जातानि शष्पाणि बालतृणानि यस्मिंस्तत्। शष्पं बालतृणं घासः इत्यमरः। गौरीगुरोः पार्वतीपितुर्गह्वरं गुहामाविवेश ॥
Summary
AI
On another day, the sage's sacrificial cow, wishing to test the devotion of her follower, King Dilipa, entered a cave in the Himalayas—the father of Gauri—where tender grass grew near the waterfalls of the Ganga.
सारांश
AI
एक दिन राजा की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए मुनि की वह होमधेनु हिमालय की एक गुफा में प्रविष्ट हुई, जहाँ गंगा के झरनों के पास हरी घास उगी हुई थी।
पदच्छेदः
AI
| अन्येद्युः | अन्येद्युस् | on another day |
| आत्म-अनुचरस्य | आत्मन्–अनुचर (६.१) | of her own follower |
| भावम् | भाव (२.१) | the disposition |
| जिज्ञासमाना | जिज्ञासमान (√ज्ञा+सन्+शानच्, १.१) | desiring to know |
| मुनि-होम-धेनुः | मुनि–होम–धेनु (१.१) | the sage's sacrificial cow |
| गङ्गा-प्रपात-अन्त-विरूढ-शष्पम् | गङ्गा–प्रपात–अन्त–विरूढ–शष्प (२.१) | where tender grass grew near the waterfalls of the Ganga |
| गौरी-गुरोः | गौरी–गुरु (६.१) | of the father of Gauri (Himalaya) |
| गह्वरम् | गह्वर (२.१) | a cave |
| आविवेश | आविवेश (आ√विश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | entered |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | न्ये | द्यु | रा | त्मा | नु | च | र | स्य | भा | वं |
| जि | ज्ञा | स | मा | ना | मु | नि | हो | म | धे | नुः |
| ग | ङ्गा | प्र | पा | ता | न्त | वि | रू | ढ | श | ष्पं |
| गौ | री | गु | रो | र्ग | ह्व | र | मा | वि | वे | श |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.