सा दुष्प्रधर्षा मनसापि हिंस्रै-
रित्यद्रिशोभाप्रहितेक्षणेन ।
अलक्षिताभ्युत्पतनो नृपेण
प्रसह्य सिंहः किल तां चकर्ष ॥
सा दुष्प्रधर्षा मनसापि हिंस्रै-
रित्यद्रिशोभाप्रहितेक्षणेन ।
अलक्षिताभ्युत्पतनो नृपेण
प्रसह्य सिंहः किल तां चकर्ष ॥
रित्यद्रिशोभाप्रहितेक्षणेन ।
अलक्षिताभ्युत्पतनो नृपेण
प्रसह्य सिंहः किल तां चकर्ष ॥
अन्वयः
AI
हिंस्रैः मनसा अपि दुष्प्रधर्षा सा इति अद्रि-शोभा-प्रहित-ईक्षणेन नृपेण अलक्षित-अभ्युत्पतनः सिंहः ताम् प्रसह्य चकर्ष किल।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
सेति॥ सा धेनुर्हिंस्रैर्व्याघ्रादिभिर्मनसाऽपि दुष्प्रधर्षा दुर्धर्षेति हेतोः, अद्रिशोभायां प्रहितेक्षणेन दत्तदृष्टिना नृपेणालक्षितमभ्युत्पतनमाभिमुख्येनोत्पतनं यस्य स सिंहस्तां धेनुं प्रसह्य हठात्।
प्रसह्य तु हठार्थकम् इत्यमरः (अमरकोशः ३.४.१० ) । चकर्ष। किल इत्यलीके ॥
Summary
AI
While the king, his gaze fixed on the mountain's beauty, thought, "She is unassailable even in thought by predators," a lion, whose leap went unnoticed by him, forcefully attacked her.
सारांश
AI
पर्वत की सुंदरता देखने में मग्न राजा ने ध्यान नहीं दिया और तभी एक सिंह ने अचानक आक्रमण कर उस गाय को पकड़ लिया, जिसे कोई मन से भी हानि पहुँचाने का साहस नहीं कर सकता था।
पदच्छेदः
AI
| सा | तद् (१.१) | she |
| दुष्प्रधर्षा | दुष्प्रधर्ष (१.१) | unassailable |
| मनसा | मनस् (३.१) | by mind |
| अपि | अपि | even |
| हिंस्रैः | हिंस्र (३.३) | by predators |
| इति | इति | thus |
| अद्रि-शोभा-प्रहित-ईक्षणेन | अद्रि–शोभा–प्रहित–ईक्षण (३.१) | by him whose gaze was directed towards the mountain's beauty |
| अलक्षित-अभ्युत्पतनः | अलक्षित–अभ्युत्पतन (१.१) | whose leap was unnoticed |
| नृपेण | नृप (३.१) | by the king |
| प्रसह्य | प्रसह्य (प्र√सह्+ल्यप्) | forcefully |
| सिंहः | सिंह (१.१) | a lion |
| किल | किल | indeed |
| ताम् | तद् (२.१) | her |
| चकर्ष | चकर्ष (√कृष् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attacked |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | दु | ष्प्र | ध | र्षा | म | न | सा | पि | हिं | स्रै |
| रि | त्य | द्रि | शो | भा | प्र | हि | ते | क्ष | णे | न |
| अ | ल | क्षि | ता | भ्यु | त्प | त | नो | नृ | पे | ण |
| प्र | स | ह्य | सिं | हः | कि | ल | तां | च | क | र्ष |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.