तस्यालमेषा क्षुधितस्य तृप्त्यै
प्रदिष्टकाला परमेश्वरेण ।
उपस्थिता शोणितपारणा मे
सुरद्विषश्चान्द्रमसी सुधेव ॥

अन्वयः AI क्षुधितस्य तस्य मे तृप्त्यै परम-ईश्वरेण प्रदिष्ट-काला एषा शोणित-पारणा, सुर-द्विषः चान्द्रमसी सुधा इव, उपस्थिता।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) तस्येति॥ परमेश्वरेण प्रदिष्टो निर्दिष्टः कालो भोजनवेला यस्याः सोपस्थिता प्राप्ता एषा गोरूपा शोणितपारणा रुधिरस्य व्रतान्तभोजनम्। सुरद्विषोराहोः चन्द्रमस इयं चान्द्रमसी सुधेव क्षुधितस्य तस्याङ्कागतसत्त्ववृत्तेर्मे मम सिंहस्य तृप्त्या अलं पर्याप्ता। नमःस्वस्ति- (अष्टाध्यायी २.३.१६ ) इत्यादिना चतुर्थी ॥
Summary AI "For the satisfaction of my hunger, this cow has arrived as my blood-meal, her time ordained by the Supreme Lord, just as the nectar of the moon presents itself to Rahu, the enemy of the gods."
सारांश AI शिव की आज्ञा से यह गाय आज मेरे भोजन के लिए यहाँ स्वयं आई है। मेरी भूख शांत करने के लिए यह रक्त का आहार वैसा ही है जैसे राहु के लिए चंद्रमा का अमृत।
पदच्छेदः AI
तस्यतद् (६.१) of that (me)
अलम्अलम् sufficient
एषाएतद् (१.१) this (cow)
क्षुधितस्यक्षुधित (√क्षुध्+क्त, ६.१) of the hungry
तृप्त्यैतृप्ति (४.१) for satisfaction
प्रदिष्ट-कालाप्रदिष्टकाल (१.१) whose time has been ordained
परम-ईश्वरेणपरमईश्वर (३.१) by the Supreme Lord (Shiva)
उपस्थिताउपस्थित (उप√स्था+क्त, १.१) has arrived
शोणित-पारणाशोणित–पारणा (१.१) the breaking of a fast with blood
मेअस्मद् (६.१) for me
सुर-द्विषःसुरद्विष् (६.१) of the enemy of the gods (Rahu)
चान्द्रमसीचान्द्रमसी (१.१) related to the moon
सुधासुधा (१.१) nectar
इवइव like
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
स्या मे षा क्षु धि स्य तृ प्त्यै
प्र दि ष्ट का ला मे श्व रे
स्थि ता शो णि पा णा मे
सु द्वि श्चा न्द्र सी सु धे
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