स त्वं मदीयेन शरीरवृत्तिं
देहेन निर्वर्तयितुं प्रसीद ।
दिनावसानोत्सुकबालवत्सा
विसृज्यतां धेनुरियं महर्षेः ॥
स त्वं मदीयेन शरीरवृत्तिं
देहेन निर्वर्तयितुं प्रसीद ।
दिनावसानोत्सुकबालवत्सा
विसृज्यतां धेनुरियं महर्षेः ॥
देहेन निर्वर्तयितुं प्रसीद ।
दिनावसानोत्सुकबालवत्सा
विसृज्यतां धेनुरियं महर्षेः ॥
अन्वयः
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सः त्वम् मदीयेन देहेन शरीर-वृत्तिम् निर्वर्तयितुम् प्रसीद। दिन-अवसान-उत्सुक-बाल-वत्सा इयम् महर्षेः धेनुः विसृज्यताम्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
स इति॥ सोऽङ्कागतसत्त्ववृत्तिस्त्वं मदीयेन देहेन शरीरस्य वृत्तिं जीवनं निर्वर्तयितुं संपादयितुं प्रसीद। दिनावसान उत्सुको
माता ममागमिष्यति इत्युत्काण्ठतो बालवत्सो यस्याः सा महर्षेरियं धेनुर्विसृज्यताम् ॥
Summary
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"Therefore, be pleased to satisfy your hunger with my body. Let this cow of the great sage, whose young calf is eagerly awaiting her at day's end, be released."
सारांश
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आप मेरे शरीर से अपनी क्षुधा शांत कर मुझ पर प्रसन्न हों और महर्षि की इस गौ को छोड़ दें, जिसका छोटा बछड़ा दिन ढलने पर उसकी प्रतीक्षा कर रहा होगा।
पदच्छेदः
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| सः | तद् (१.१) | that (you) |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| मदीयेन | मदीय (३.१) | with my |
| शरीर-वृत्तिम् | शरीर–वृत्ति (२.१) | sustenance of the body |
| देहेन | देह (३.१) | body |
| निर्वर्तयितुम् | निर्वर्तयितुम् (निर्√वृत्+णिच्+तुमुन्) | to accomplish |
| प्रसीद | प्रसीद (प्र√सद् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | be pleased |
| दिन-अवसान-उत्सुक-बाल-वत्सा | दिन–अवसान–उत्सुक–बाल–वत्स (१.१) | whose young calf is eager for her at the end of the day |
| विसृज्यताम् | विसृज्यताम् (वि√सृज् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | let be released |
| धेनुः | धेनु (१.१) | the cow |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| महर्षेः | महर्षि (६.१) | of the great sage |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | त्वं | म | दी | ये | न | श | री | र | वृ | त्तिं |
| दे | हे | न | नि | र्व | र्त | यि | तुं | प्र | सी | द |
| दि | ना | व | सा | नो | त्सु | क | बा | ल | व | त्सा |
| वि | सृ | ज्य | तां | धे | नु | रि | यं | म | ह | र्षेः |
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