एतावदुक्त्वा विरते मृगेन्द्रे
प्रतिस्वनेनास्य गुहागतेन ।
शिलोच्चयोऽपि क्षितिपालमुच्चैः
प्रीत्या तमेवार्थमभाषतेव ॥
एतावदुक्त्वा विरते मृगेन्द्रे
प्रतिस्वनेनास्य गुहागतेन ।
शिलोच्चयोऽपि क्षितिपालमुच्चैः
प्रीत्या तमेवार्थमभाषतेव ॥
प्रतिस्वनेनास्य गुहागतेन ।
शिलोच्चयोऽपि क्षितिपालमुच्चैः
प्रीत्या तमेवार्थमभाषतेव ॥
अन्वयः
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मृगेन्द्रे एतावत् उक्त्वा विरते (सति), अस्य गुहागतेन प्रतिस्वनेन शिलोच्चयः अपि प्रीत्या तम् एव अर्थम् उच्चैः क्षितिपालम् अभाषत इव।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
एतावदिति॥ मृगेन्द्र एतावदुक्त्वा विरते सति गुह्नागतेनास्य सिंहस्य प्रतिस्वनेन शिलोच्चयः शैलोऽपि प्रीत्या तमेवार्थं क्षितिपालमुञ्चैरभाषतेव। इत्युत्प्रेक्षा। भाषिरयं ब्रुविसमानार्थत्वाद्दिकर्मकः। ब्रुविस्तु द्विकर्मकेषु पठितः। तदुक्तम्-
दुहियाचिरुधिप्रच्छिभिक्षिचिञामुपयोगनिमित्तमपूर्वविधौ। ब्रुविशासिगुणेन च यत्सचते तदकीर्तितमाचरितं कविना ॥ इति ॥
Summary
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When the king of beasts fell silent after speaking thus, the mountain, through the echo of his voice from the caves, seemed to lovingly and loudly repeat that very same message to the king.
सारांश
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सिंह के इतना कहकर चुप होने पर, गुफाओं से गूंजती उसकी प्रतिध्वनि के माध्यम से पर्वत भी राजा से वही बात पुनः कहता हुआ सा प्रतीत हुआ।
पदच्छेदः
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| एतावत् | एतावत् (२.१) | this much |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच्+क्त्वा) | having said |
| विरते | विरत (वि√रम्+क्त, ७.१) | having ceased |
| मृगेन्द्रे | मृगेन्द्र (७.१) | the king of beasts |
| प्रतिस्वनेन | प्रतिस्वन (३.१) | by the echo |
| अस्य | इदम् (६.१) | of his |
| गुहागतेन | गुहा–गत (३.१) | coming from the cave |
| शिलोच्चयः | शिल–उच्चय (१.१) | the mountain |
| अपि | अपि | also |
| क्षितिपालम् | क्षितिपाल (२.१) | to the king |
| उच्चैः | उच्चैस् | loudly |
| प्रीत्या | प्रीति (३.१) | with affection |
| तम् | तद् (२.१) | that |
| एव | एव | very |
| अर्थम् | अर्थ (२.१) | meaning |
| अभाषत | अभाषत (आ√भाष् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | spoke |
| इव | इव | as it were |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | ता | व | दु | क्त्वा | वि | र | ते | मृ | गे | न्द्रे |
| प्र | ति | स्व | ने | ना | स्य | गु | हा | ग | ते | न |
| शि | लो | च्च | यो | ऽपि | क्षि | ति | पा | ल | मु | च्चैः |
| प्री | त्या | त | मे | वा | र्थ | म | भा | ष | ते | व |
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