कथं नु शक्योऽनुनयो महर्षे-
र्विश्राणनाञ्चान्यपयस्विनीनाम् ।
इमामनूनां सुरभेरवेहि
रुद्रौजसा तु प्रहृतं त्वयाऽस्याम् ॥
कथं नु शक्योऽनुनयो महर्षे-
र्विश्राणनाञ्चान्यपयस्विनीनाम् ।
इमामनूनां सुरभेरवेहि
रुद्रौजसा तु प्रहृतं त्वयाऽस्याम् ॥
र्विश्राणनाञ्चान्यपयस्विनीनाम् ।
इमामनूनां सुरभेरवेहि
रुद्रौजसा तु प्रहृतं त्वयाऽस्याम् ॥
अन्वयः
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अन्यपयस्विनीनाम् विश्राणनात् च महर्षेः अनुनयः कथम् नु शक्यः? इमाम् सुरभेः अनूनाम् अवेहि। तु त्वया अस्याम् रुद्रौजसा प्रहृतम्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
कथमिति॥ अनुनयः क्रोधापनयः। चकारो वाकारार्थः। महर्षेरनुनयो वाऽन्यासां पयस्विनीनां दोग्ध्रीणां गवां विश्राणनाद्दानात्।
त्यागो वितरणं दानमुत्सर्जनविसर्जने। विश्राणनं वितरणम् इत्यमरः (अमरकोशः २.७.३१ ) । कथं नु शक्यः? न शक्य इत्यर्थः। अत्र हेतुमाह-इमां गां सुरभेः कामधेनोः। पञ्चमी विभक्ते (अष्टाध्यायी २.३.४२ ) इति पञ्चमी। अनूनामन्यूनामवेहि जानीहि। तर्हि कथमस्याः परिभवोऽभूदित्याह-रुद्रौजसेति। अस्यां गवि त्वया कर्त्रा प्रहृतं तु प्रहारस्तु। नपुंसके भावे क्तः। रुद्रौजसेश्वरसामर्थ्येन। न तु त्वयेत्यर्थः। सप्तम्यधिकरणे च (अष्टाध्यायी २.३.३६ ) इति सप्तमी॥
Summary
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"How can the great sage possibly be appeased by the gift of other cows? Know this cow to be no less than Surabhi herself. And you have attacked her with the very power of Rudra."
सारांश
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अन्य गायों के दान से महर्षि को संतुष्ट नहीं किया जा सकता। इसे साक्षात कामधेनु के समान समझें, जिस पर आपने केवल शिव के प्रभाव के कारण ही प्रहार किया है।
पदच्छेदः
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| कथम् | कथम् | How |
| नु | नु | indeed |
| शक्यः | शक्य (१.१) | is it possible |
| अनुनयः | अनुनय (१.१) | the appeasement |
| महर्षेः | महर्षि (६.१) | of the great sage |
| विश्राणनात् | विश्राणन (५.१) | by the gift |
| च | च | and |
| अन्यपयस्विनीनाम् | अन्य–पयस्विनी (६.३) | of other milk-cows |
| इमाम् | इदम् (२.१) | this (cow) |
| अनूनाम् | अनून (२.१) | not less than |
| सुरभेः | सुरभि (६.१) | Surabhi (the celestial cow) |
| अवेहि | अवेहि (अव√इ कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | know |
| रुद्रौजसा | रुद्र–ओजस् (३.१) | with the power of Rudra |
| तु | तु | But |
| प्रहृतम् | प्रहृतम् (प्र√हृ+क्त) | it has been attacked |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| अस्याम् | इदम् (७.१) | on her |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | थं | नु | श | क्यो | ऽनु | न | यो | म | ह | र्षे |
| र्वि | श्रा | ण | ना | ञ्चा | न्य | प | य | स्वि | नी | नाम् |
| इ | मा | म | नू | नां | सु | र | भे | र | वे | हि |
| रु | द्रौ | ज | सा | तु | प्र | हृ | तं | त्व | या | ऽस्याम् |
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