संबन्धमाभाषणपूर्वमाहु-
र्वृत्तः स नौ संगतयोर्वनान्ते ।
तद्भूतनाथानुग नार्हसि त्वं
संबन्धिनो मे प्रणयं विहन्तुम् ॥
संबन्धमाभाषणपूर्वमाहु-
र्वृत्तः स नौ संगतयोर्वनान्ते ।
तद्भूतनाथानुग नार्हसि त्वं
संबन्धिनो मे प्रणयं विहन्तुम् ॥
र्वृत्तः स नौ संगतयोर्वनान्ते ।
तद्भूतनाथानुग नार्हसि त्वं
संबन्धिनो मे प्रणयं विहन्तुम् ॥
अन्वयः
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(पण्डिताः) संबन्धम् भाषणपूर्वम् आहुः। वनान्ते संगतयोः नौ सः (संबन्धः) वृत्तः। तत् भूतनाथानुग! त्वम् संबन्धिनः मे प्रणयम् विहन्तुम् न अर्हसि।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
संबन्धमिति॥ संबन्धं सख्यम्। आभाषणमालापः पूर्वं कारणं यस्य तमाहुः।
स्यादाभाषणमालापः इत्यमरः (अमरकोशः १.६.१५ ) । स तादृक्संबन्धो वनान्ते संगतयोर्नावावयोर्वृत्तो जातः। तत्ततो हेतोर्हे भूतनाथानुग शिवानुचर!। एतेन तस्य महत्त्वं सूचयति। अत एव संबन्धिनो मित्रस्य मे प्रणयं याञ्चाम्। प्रणयास्त्मी। विश्रम्भयाञ्चाप्रेमाणः इत्यमरः (अमरकोशः १.६.१५ ) । विहन्तुं नार्हसि ॥
Summary
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"They say a relationship begins with conversation. Such a bond has now formed between us, who have met here in the forest. Therefore, O follower of Shiva, you should not refuse the request of me, who is now your kinsman."
सारांश
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विद्वान कहते हैं कि परस्पर वार्तालाप से मित्रता का संबंध स्थापित होता है। वन में हमारे बीच वह संबंध बन चुका है, अतः आप मेरे निवेदन को स्वीकार करें।
पदच्छेदः
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| संबन्धम् | संबन्ध (२.१) | A relationship |
| आभाषणपूर्वम् | आभाषण–पूर्व (२.१) | is preceded by conversation |
| आहुः | आहुः (√अह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they say |
| वृत्तः | वृत्त (√वृत्+क्त, १.१) | has occurred |
| सः | तद् (१.१) | that |
| नौ | अस्मद् (६.२) | between us two |
| संगतयोः | संगत (सम्√गम्+क्त, ६.२) | who have met |
| वनान्ते | वन–अन्त (७.१) | in the forest-end |
| तत् | तत् | Therefore |
| भूतनाथानुग | भूतनाथ–अनुग (८.१) | O follower of the Lord of Beings |
| न | न | not |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you should |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| संबन्धिनः | संबन्धिन् (६.१) | of a kinsman |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| प्रणयम् | प्रणय (२.१) | request |
| विहन्तुम् | विहन्तुम् (वि√हन्+तुमुन्) | to refuse |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | ब | न्ध | मा | भा | ष | ण | पू | र्व | मा | हु |
| र्वृ | त्तः | स | नौ | सं | ग | त | यो | र्व | ना | न्ते |
| त | द्भू | त | ना | था | नु | ग | ना | र्ह | सि | त्वं |
| सं | ब | न्धि | नो | मे | प्र | ण | यं | वि | ह | न्तुम् |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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