उत्तिष्ठ वत्सेत्यमृतायमानं
वचो निशम्योत्थितमुत्थितः सन् ।
ददर्श राजा जननीमिव स्वां
गामग्रतः प्रस्रविणीं न सिंहम् ॥
उत्तिष्ठ वत्सेत्यमृतायमानं
वचो निशम्योत्थितमुत्थितः सन् ।
ददर्श राजा जननीमिव स्वां
गामग्रतः प्रस्रविणीं न सिंहम् ॥
वचो निशम्योत्थितमुत्थितः सन् ।
ददर्श राजा जननीमिव स्वां
गामग्रतः प्रस्रविणीं न सिंहम् ॥
अन्वयः
AI
"वत्स, उत्तिष्ठ" इति अमृतायमानम् उत्थितम् वचः निशम्य, उत्थितः सन् राजा अग्रतः स्वाम् जननीम् इव प्रस्रविणीम् गाम् ददर्श, न सिंहम्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
उत्तिष्ठेति॥ राजा। अमृतमिवाचरतीत्यमृतायमानम्।
उपमानादाचारे (अष्टाध्यायी ३.१.१० ) इति क्यच्। ततः शानच्। उत्थितमुत्पन्नम्, हे वत्स! उत्तिष्ठ इति वचो निशम्य श्रुत्वा। उत्थितः सन्। अस्तेः शतृप्रत्ययः। अग्रतोऽग्रे प्रस्रवः क्षीरस्रावोऽस्ति यस्याः सा तां प्रस्रविणीं गां स्वां जननीमिव ददर्श। सिंहं न ददर्श ॥
Summary
AI
Hearing the nectar-like words, "Arise, my child!", the king rose and saw before him not the lion, but the cow, lactating with affection like his own mother.
सारांश
AI
"वत्स, उठो!"—अमृत के समान मधुर वाणी सुनकर जब राजा उठे, तो उन्होंने अपने सामने सिंह के स्थान पर दूध बरसाती हुई अपनी माता के समान गाय नंदिनी को देखा।
पदच्छेदः
AI
| उत्तिष्ठ | उत्तिष्ठ (उद्√स्था कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | Arise |
| वत्स | वत्स (८.१) | O child |
| इति | इति | thus |
| अमृतायमानम् | अमृतायमान (√अमृत+क्यङ्+शानच्, २.१) | nectar-like |
| वचः | वचस् (२.१) | words |
| निशम्य | निशम्य (नि√शम्+ल्यप्) | having heard |
| उत्थितम् | उत्थित (उद्√स्था+क्त, २.१) | that had arisen |
| उत्थितः | उत्थित (उद्√स्था+क्त, १.१) | having risen |
| सन् | सत् (√अस्+शतृ, १.१) | being |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | saw |
| राजा | राजन् (१.१) | the king |
| जननीम् | जननी (२.१) | mother |
| इव | इव | like |
| स्वाम् | स्व (२.१) | his own |
| गाम् | गो (२.१) | the cow |
| अग्रतः | अग्रतस् | before him |
| प्रस्रविणीम् | प्रस्रविणी (२.१) | lactating |
| न | न | not |
| सिंहम् | सिंह (२.१) | the lion |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | त्ति | ष्ठ | व | त्से | त्य | मृ | ता | य | मा | नं |
| व | चो | नि | श | म्यो | त्थि | त | मु | त्थि | तः | सन् |
| द | द | र्श | रा | जा | ज | न | नी | मि | व | स्वां |
| गा | म | ग्र | तः | प्र | स्र | वि | णीं | न | सिं | हम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.