तं विस्मितं धेनुरुवाच साधो
मायां मयोद्भाव्य परीक्षितोऽसि ।
ऋषिप्रभावान्मयि नान्तकोऽपि
प्रभुः प्रहर्तुं किमुतान्यहिंस्राः ॥
तं विस्मितं धेनुरुवाच साधो
मायां मयोद्भाव्य परीक्षितोऽसि ।
ऋषिप्रभावान्मयि नान्तकोऽपि
प्रभुः प्रहर्तुं किमुतान्यहिंस्राः ॥
मायां मयोद्भाव्य परीक्षितोऽसि ।
ऋषिप्रभावान्मयि नान्तकोऽपि
प्रभुः प्रहर्तुं किमुतान्यहिंस्राः ॥
अन्वयः
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धेनुः विस्मितम् तम् उवाच - "साधो! मया मायाम् उद्भाव्य परीक्षितः असि। ऋषिप्रभावात् मयि अन्तकः अपि प्रहर्तुम् प्रभुः न (अस्ति), अन्यहिंस्राः किम् उत?"
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तमिति॥ विस्मितमाश्चर्यं गतम्। कर्तरि क्तः। तं दिलीपं धेनुरुवाच । किमित्यत्राह-हे साधो! मया मायामुद्भाव्य कल्पयित्वा परीक्षितोऽसि। ऋषिप्रभावान्मय्यन्तको यमोऽपि प्रहर्तुं न प्रभुर्न समर्थः। अन्ये हिंस्ना घातुकाः।
शरारुर्घातुको हिंस्रः इत्यमरः (अमरकोशः ३.१.२८ ) । नमिकम्पि- (अष्टाध्यायी ३.१.१६७ ) इत्यादिना रप्रत्ययः। किमुत सुष्ठु, न प्रभव इति योज्यम्। बलवत्सुष्टु किमुत स्वत्यतीव च निर्भरे इत्यमरः (अमरकोशः ३.१.२८ ) ॥
Summary
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The cow said to the astonished king: "O noble one, you have been tested by me through an illusion I created. Due to the sage's power, not even the God of Death is able to harm me, let alone other beasts of prey."
सारांश
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आश्चर्यचकित राजा से नंदिनी ने कहा कि हे सज्जन, मैंने माया रचकर तुम्हारी परीक्षा ली है। महर्षि के प्रभाव से मुझ पर साक्षात् काल भी प्रहार नहीं कर सकता, फिर अन्य हिंसक जीवों की तो बात ही क्या।
पदच्छेदः
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| तम् | तद् (२.१) | to him |
| विस्मितम् | विस्मित (वि√स्मि+क्त, २.१) | the astonished one |
| धेनुः | धेनु (१.१) | The cow |
| उवाच | उवाच (√वच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| साधो | साधु (८.१) | O noble one |
| माया | माया (१.१) | an illusion |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| उद्भाव्य | उद्भाव्य (उद्√भू+णिच्+ल्यप्) | having created |
| परीक्षितः | परीक्षित (परि√ईक्ष्+क्त, १.१) | you have been tested |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you are |
| ऋषिप्रभावात् | ऋषि–प्रभाव (५.१) | Due to the sage's power |
| मयि | अस्मद् (७.१) | on me |
| न | न | not |
| अन्तकः | अन्तक (१.१) | Yama (god of death) |
| अपि | अपि | even |
| प्रभुः | प्रभु (१.१) | is able |
| प्रहर्तुम् | प्रहर्तुम् (प्र√हृ+तुमुन्) | to strike |
| किम् | किम् | what |
| उत | उत | then |
| अन्यहिंस्राः | अन्य–हिंस्र (१.३) | of other predators |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तं | वि | स्मि | तं | धे | नु | रु | वा | च | सा | धो |
| मा | यां | म | यो | द्भा | व्य | प | री | क्षि | तो | ऽसि |
| ऋ | षि | प्र | भा | वा | न्म | यि | ना | न्त | को | ऽपि |
| प्र | भुः | प्र | ह | र्तुं | कि | मु | ता | न्य | हिं | स्राः |
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