स न्यस्तचिह्नामपि राजलक्ष्मीं
तेजोविशेषानुमितां दधानः ।
आसीदनाविष्कृतदानराजि-
रन्तर्मदावस्थ इव द्विपेन्द्रः ॥
स न्यस्तचिह्नामपि राजलक्ष्मीं
तेजोविशेषानुमितां दधानः ।
आसीदनाविष्कृतदानराजि-
रन्तर्मदावस्थ इव द्विपेन्द्रः ॥
तेजोविशेषानुमितां दधानः ।
आसीदनाविष्कृतदानराजि-
रन्तर्मदावस्थ इव द्विपेन्द्रः ॥
अन्वयः
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सः न्यस्तचिह्नाम् अपि तेजोविशेषानुमिताम् राजलक्ष्मीम् दधानः, अनाविष्कृतदानराजिः अन्तर्मदावस्थः द्विपेन्द्रः इव आसीत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
स इति॥ न्यस्तानि परिहृतानि चिह्नानि छत्रचामरादीनि यस्यास्तां तथाभूतामपि तेजोविशेषेण प्रभावातिशयेन। अनुमितां सर्वथा राजैवायं भवेदित्यूहितां राजलक्ष्मीं दधानः स राजा। अनाविष्कृतदानराजिर्वहिरप्रकटितमदरेखः। अन्तर्गता मदावस्था यस्य सोऽन्तर्मदावस्थः। तथाभूतो द्विपेन्द्र इव। आसीत्॥
Summary
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Though he had set aside the royal insignia, he still bore the royal splendor, which was inferred from his exceptional majesty. He was like a lordly elephant whose line of rut-fluid is not yet visible but whose inner state of rut is evident.
सारांश
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राजसी चिह्नों को त्याग देने पर भी वे अपने विशिष्ट तेज से वैसे ही सुशोभित हो रहे थे, जैसे मद की रेखाओं के प्रकट न होने पर भी भीतर से मदमस्त कोई श्रेष्ठ हाथी शोभा पाता है।
पदच्छेदः
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| सः | तद् (१.१) | He |
| न्यस्तचिह्नाम् | न्यस्त–चिह्न (२.१) | with insignia laid aside |
| अपि | अपि | even |
| राजलक्ष्मीम् | राजलक्ष्मी (२.१) | royal splendor |
| तेजोविशेषानुमिताम् | तेजस्–विशेष–अनुमित (२.१) | inferred from his exceptional majesty |
| दधानः | दधान (√धा+शानच्, १.१) | bearing |
| आसीत् | आसीत् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| अनाविष्कृतदानराजिः | अनाविष्कृत–दान–राजि (१.१) | one whose line of rut-fluid was not manifested |
| अन्तर्मदावस्थः | अन्तर्–मद–अवस्था (१.१) | in an inner state of rut |
| इव | इव | like |
| द्विपेन्द्रः | द्विप–इन्द्र (१.१) | a lordly elephant |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | न्य | स्त | चि | ह्ना | म | पि | रा | ज | ल | क्ष्मीं |
| ते | जो | वि | शे | षा | नु | मि | तां | द | धा | नः |
| आ | सी | द | ना | वि | ष्कृ | त | दा | न | रा | जि |
| र | न्त | र्म | दा | व | स्थ | इ | व | द्वि | पे | न्द्रः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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