श्रोत्राभिरामध्वनिना रथेन
स धर्मपत्नीसहितः सहिष्णुः ।
ययावनुद्धातसुखेन मार्गं
स्वेनेव पूर्णेन मनोरथेन ॥
श्रोत्राभिरामध्वनिना रथेन
स धर्मपत्नीसहितः सहिष्णुः ।
ययावनुद्धातसुखेन मार्गं
स्वेनेव पूर्णेन मनोरथेन ॥
स धर्मपत्नीसहितः सहिष्णुः ।
ययावनुद्धातसुखेन मार्गं
स्वेनेव पूर्णेन मनोरथेन ॥
अन्वयः
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सहिष्णुः सः धर्मपत्नी-सहितः (सन्) श्रोत्र-अभिराम-ध्वनिना अनुद्धात-सुखेन रथेन, पूर्णेन स्वेन मनोरथेन इव, मार्गम् ययौ ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
श्रोत्रेति॥ धर्मपत्नीसहितः सहिष्णुर्व्रतादिदुःखसहनशीलः स नृपः श्रोत्राभिरामध्वनिना कर्णाह्लादकरस्वनेनानुद्धातः पाषाणादि प्रति घातरहितः। अत एव सुखयतीति सुखः, तेन रथेन। स्वेन पूर्णेन सफलेन मनोरथेनेव। मार्गमध्वानं ययौ। मनोरथपक्षे, -ध्वनिः श्रुतिः। अनुद्धातः प्रतिबन्धनिवृत्तिः॥
Summary
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The patient king, accompanied by his lawful wife, traveled the path in a chariot that was comfortable, jolt-free, and had a sound pleasing to the ears. It was as if he was traveling by his own fulfilled desire.
सारांश
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मधुर ध्वनि वाले रथ में अपनी पत्नी के साथ राजा उस निर्बाध मार्ग पर इस प्रकार चले, मानो वे अपने पूर्ण हुए मनोरथ पर ही सवार होकर जा रहे हों।
पदच्छेदः
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| श्रोत्राभिरामध्वनिना | श्रोत्र–अभिराम–ध्वनि (३.१) | with a sound pleasing to the ears |
| रथेन | रथ (३.१) | by the chariot |
| सः | तद् (१.१) | he |
| धर्मपत्नीसहितः | धर्मपत्नी–सहित (१.१) | accompanied by his lawful wife |
| सहिष्णुः | सहिष्णु (१.१) | the patient one |
| ययौ | ययौ (√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | traveled |
| अनुद्धातसुखेन | अनुद्धात–सुख (३.१) | with jolt-free comfort |
| मार्गं | मार्ग (२.१) | the path |
| स्वेन | स्व (३.१) | by his own |
| इव | इव | as if |
| पूर्णेन | पूर्ण (√पूर्+क्त, ३.१) | by the fulfilled |
| मनोरथेन | मनस्–रथ (३.१) | by the desire |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्रो | त्रा | भि | रा | म | ध्व | नि | ना | र | थे | न |
| स | ध | र्म | प | त्नी | स | हि | तः | स | हि | ष्णुः |
| य | या | व | नु | द्धा | त | सु | खे | न | मा | र्गं |
| स्वे | ने | व | पू | र्णे | न | म | नो | र | थे | न |
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