प्रियानुरागस्य मनः समुन्नते-
र्भुजार्जितानां च दिगन्तसंपदाम् ।
यथाक्रमं पुंसवनादिकाः क्रिया
धृतेश्च धीरः सदृशीर्व्यधत्त सः ॥
प्रियानुरागस्य मनः समुन्नते-
र्भुजार्जितानां च दिगन्तसंपदाम् ।
यथाक्रमं पुंसवनादिकाः क्रिया
धृतेश्च धीरः सदृशीर्व्यधत्त सः ॥
र्भुजार्जितानां च दिगन्तसंपदाम् ।
यथाक्रमं पुंसवनादिकाः क्रिया
धृतेश्च धीरः सदृशीर्व्यधत्त सः ॥
अन्वयः
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धीरः सः प्रिया-अनुरागस्य, मनः-समुन्नतेः, भुज-अर्जितानाम् दिगन्त-सम्पदाम् च, धृतेः च सदृशीः पुंसवन-आदिकाः क्रियाः यथा-क्रमम् व्यधत्त ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
प्रियेति॥ धीरः स राजा प्रियायामनुरागस्य स्नेहस्य । मनसः समुन्नतेरौदार्यस्य। भुजेन भुजबलेन करेण वाऽर्जितानाम्, न तु वाणिज्यादिना। दिगन्तेषु संपदाम्। धृत्तेः पुत्रो मे भविष्यतीति संतोषस्य च,
धृतिर्योगान्तरे धैर्ये धारणाध्वरतुष्टिषु इति विश्वः। सदृशीरनुरूपाः। पुमान् सूयतेऽनेनेति पुंसवनम्। तदादिर्यासां ताः क्रिया यथाक्रमं क्रममनतिक्रम्य व्यधत्त कृतवान्। आदि- शब्देनानवलोभनसीमन्तोन्नयने गृह्येते। अत्र मासि द्वितीये तृतीये वा पुंसवनम्। यदहः पुंसा नक्षत्रेण चन्द्रमा युक्तः स्यात् (१।१६।३) इति पारस्करः। चतुर्थेऽनवलोभनम्(१।१४) इत्याश्वलायनः । षष्ठेऽष्टमे वा सीमन्तोन्नयनं (आचार.११) इति याज्ञवल्क्यः ॥
Summary
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That steadfast king duly performed the Pumsavana and other rites. These ceremonies were befitting his love for his wife, his own exalted state of mind, the vast wealth he had acquired by his arms reaching the ends of the earth, and the precious conception itself.
सारांश
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राजा दिलीप ने अपनी शक्ति, धैर्य और पत्नी के प्रति गहरे अनुराग के अनुरूप ही पुत्र-प्राप्ति के लिए पुंसवन आदि संस्कारों को शास्त्रीय विधि से संपन्न किया।
पदच्छेदः
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| प्रियानुरागस्य | प्रिय–अनुराग (६.१) | of his love for his beloved |
| मनःसमुन्नतेः | मनस्–समुन्नति (६.१) | of his mental exaltation |
| भुजार्जितानां | भुज–अर्जित (६.३) | of the earned by his arms |
| च | च | and |
| दिगन्तसंपदाम् | दिगन्त–सम्पद् (६.३) | of the wealth of the world's ends |
| यथाक्रमं | यथाक्रमम् | in due order |
| पुंसवनादिकाः | पुंसवन–आदिक (२.३) | the Pumsavana and other |
| क्रियाः | क्रिया (२.३) | rites |
| धृतेश्च | धृति (६.१)–च | and of the conception |
| धीरः | धीर (१.१) | the steadfast |
| सदृशीः | सदृशी (२.३) | befitting |
| व्यधत्त | व्यधत्त (वि√धा कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | performed |
| सः | तद् (१.१) | he |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रि | या | नु | रा | ग | स्य | म | नः | स | मु | न्न | ते |
| र्भु | जा | र्जि | ता | नां | च | दि | ग | न्त | सं | प | दाम् |
| य | था | क्र | मं | पुं | स | व | ना | दि | काः | क्रि | या |
| धृ | ते | श्च | धी | रः | स | दृ | शी | र्व्य | ध | त्त | सः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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