सुरेन्द्रमात्राश्रितगर्भगौरवा-
त्प्रयत्नमुक्तासनया गृहागतः ।
तयोपचाराञ्जलिखिन्नहस्तया
ननन्द पारिप्लवनेत्रया नृपः ॥

अन्वयः AI गृह-आगतः नृपः सुरेन्द्रमात्रा-आश्रित-गर्भ-गौरवात् प्रयत्न-मुक्त-आसनया पारिप्लव-नेत्रया उपचार-अञ्जलि-खिन्न-हस्तया तया ननन्द ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) सुरेन्द्रेति॥ गृहागतो नृपः सुरेन्द्राणां लोकपालानां मात्राभिरंशैराश्रितस्यानुप्रविष्टस्य गर्भस्य गौरवाद्भारात् प्रयत्नेन मुक्तासनया। आसनादुत्थितयेत्यर्थः। उपचारस्याञ्जलावञ्जलिकरणे खिन्नहस्तया पारिप्लवनेत्रया तरलाक्ष्या। चञ्चलं तरलं चैव पारिप्लवपरिप्लवे इत्यमरः। तया सुदक्षिणया ननन्द। सुरेन्द्रमात्राश्रित- इत्यत्र मनुः(५।९६)- अष्टाभिश्च सुरेन्द्राणां मात्राभिर्निर्मितो नृपः इति ॥
Summary AI The king, having come home, was delighted by Queen Sudakshina. Due to the weight of her pregnancy, which made her resemble Indra's mother Aditi, she rose from her seat with effort. Her eyes were restless, and her hands were weary from offering respectful greetings.
सारांश AI गर्भ के भार के कारण सुदक्षिणा को उठने में कष्ट हो रहा था, फिर भी उन्होंने पति का आदरपूर्वक स्वागत किया। उनके चंचल नेत्रों और शिष्टाचार की चेष्टाओं को देखकर राजा अत्यंत प्रसन्न हुए।
पदच्छेदः AI
गृह-आगतःगृहआगत (आ√गम्+क्त, १.१) who had come home
नृपःनृप (१.१) the king
सुरेन्द्रमात्राश्रितगर्भगौरवात्सुरेन्द्रमातृआश्रितगर्भगौरव (५.१) due to the heaviness of the womb which was like that of Indra's mother
प्रयत्नमुक्तासनयाप्रयत्नमुक्तआसना (३.१) by her who rose from her seat with effort
पारिप्लवनेत्रयापारिप्लव–नेत्रा (३.१) by her with restless eyes
उपचाराञ्जलिखिन्नहस्तयाउपचारअञ्जलिखिन्नहस्ता (३.१) by her whose hands were weary from making gestures of respect
तयातद् (३.१) by her
ननन्दननन्द (√नन्द् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) rejoiced
छन्दः वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
सु रे न्द्र मा त्रा श्रि र्भ गौ वा
त्प्र त्न मु क्ता या गृ हा तः
यो चा रा ञ्ज लि खि न्न स्त या
न्द पा रि प्ल ने त्र या नृ पः
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