पितुः प्रयत्नात्स समग्रसंपदः
शुभैः शरीरावयवैर्दिने दिने ।
पुपोष वृद्धिं हरिदश्वदीधिते-
रनुप्रवेशादिव बालचन्द्रमाः ॥
पितुः प्रयत्नात्स समग्रसंपदः
शुभैः शरीरावयवैर्दिने दिने ।
पुपोष वृद्धिं हरिदश्वदीधिते-
रनुप्रवेशादिव बालचन्द्रमाः ॥
शुभैः शरीरावयवैर्दिने दिने ।
पुपोष वृद्धिं हरिदश्वदीधिते-
रनुप्रवेशादिव बालचन्द्रमाः ॥
अन्वयः
AI
समग्र-संपदः सः पितुः प्रयत्नात् शुभैः शरीर-अवयवैः दिने दिने, हरिदश्व-दीधितेः अनुप्रवेशात् बाल-चन्द्रमाः इव, वृद्धिं पुपोष ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
पितुरिति॥ स रघुः समग्रसंपदः पूर्णलक्ष्मीकस्य पितुर्दिलीपस्य प्रयत्नाच्छुभैर्मनोहरैः शरीरावयवैः। हरिदश्वदीधितेः सूर्यस्य रश्मेः।
भास्वद्विवस्वत्सप्ताश्वहरिदश्वोष्णरश्मयः इत्यमरः (अमरकोशः १.३.३१ ) । अनुप्रवेशाद्बालचन्द्रमा इव। दिने दिने प्रतिदिनम्। नित्यवीप्सयोः (अष्टाध्यायी ८.१.४ ) इति द्विर्वचनम्। वृद्धिं पुपोष। अत्र वराहसंहितावचनम्-सलिलमये शशिनि रवेर्दीधितयो मूर्च्छितास्तमोनैशम्। क्षपयन्ति दर्पणोदरनिहिता इव मन्दिरस्यान्तः॥ इति ॥
Summary
AI
Through his father's diligent efforts, the prince, who was endowed with all auspicious qualities, grew day by day in the perfection of his limbs, just as the young moon grows by absorbing the rays of the sun.
सारांश
AI
पिता के संरक्षण में बालक रघु के अंगों की वृद्धि प्रतिदिन उसी प्रकार होने लगी, जैसे सूर्य की किरणों के संपर्क से बाल-चंद्रमा की कलाएँ बढ़ती हैं।
पदच्छेदः
AI
| पितुः | पितृ (६.१) | of his father |
| प्रयत्नात् | प्रयत्न (५.१) | through the efforts |
| सः | तद् (१.१) | he |
| समग्रसंपदः | समग्र–संपद् (१.१) | endowed with all excellences |
| शुभैः | शुभ (३.३) | with auspicious |
| शरीरावयवैः | शरीर–अवयव (३.३) | limbs |
| दिने | दिन (७.१) | day |
| दिने | दिन (७.१) | by day |
| पुपोष | पुपोष (√पुष् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | nourished |
| वृद्धिं | वृद्धि (२.१) | growth |
| हरिदश्वदीधितेः | हरिदश्व–दीधिति (६.१) | of the sun's rays |
| अनुप्रवेशात् | अनुप्रवेश (५.१) | from the entry |
| इव | इव | like |
| बालचन्द्रमाः | बालचन्द्रमस् (१.१) | the young moon |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पि | तुः | प्र | य | त्ना | त्स | स | म | ग्र | सं | प | दः |
| शु | भैः | श | री | रा | व | य | वै | र्दि | ने | दि | ने |
| पु | पो | ष | वृ | द्धिं | ह | रि | द | श्व | दी | धि | ते |
| र | नु | प्र | वे | शा | दि | व | बा | ल | च | न्द्र | माः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.