दिलीपसूनोः स बृहद्भुजान्तरं
प्रविश्य भीमासुरशोणितोचितः ।
पपावनास्वादितपूर्वमाशुगः
कुतूहलेनेव मनुष्यशोणितम् ॥
दिलीपसूनोः स बृहद्भुजान्तरं
प्रविश्य भीमासुरशोणितोचितः ।
पपावनास्वादितपूर्वमाशुगः
कुतूहलेनेव मनुष्यशोणितम् ॥
प्रविश्य भीमासुरशोणितोचितः ।
पपावनास्वादितपूर्वमाशुगः
कुतूहलेनेव मनुष्यशोणितम् ॥
अन्वयः
AI
सः भीमासुरशोणितोचितः आशुगः दिलीपसूनोः बृहत्-भुज-अन्तरम् प्रविश्य, अनास्वादितपूर्वम् मनुष्यशोणितम् कुतूहलेन इव पपौ ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
दिलीपेति॥ भीमानां भयंकराणामसुराणां शोणिते रुधिरे उचितः परिचितः स इन्द्गमुक्त आशुगः सायको दिलीपसूनो रघोर्बृहद्विशालं भुजान्तरं वक्षः प्रविश्य अनास्वादितपूर्वं पूर्वमनास्वादितम्। सुप्सुपेति समासः। मनुष्यशोणितं कुतूहलेनेव पपौ ॥
Summary
AI
That arrow, accustomed to the blood of fearsome demons, entered the broad chest of Dilipa's son. It drank the human blood, which it had never tasted before, as if out of curiosity.
सारांश
AI
इंद्र का वह बाण, जो असुरों का रक्त पीने का अभ्यस्त था, रघु की विशाल छाती में समा गया। ऐसा लगा मानो वह कौतूहलवश पहली बार किसी मनुष्य के रक्त का स्वाद चख रहा हो।
पदच्छेदः
AI
| दिलीपसूनोः | दिलीप–सूनु (६.१) | of Dilipa's son (Raghu) |
| सः | तद् (१.१) | that |
| बृहद्भुजान्तरम् | बृहत्–भुज–अन्तर (२.१) | the broad chest |
| प्रविश्य | प्रविश्य (प्र√विश्+ल्यप्) | having entered |
| भीमासुरशोणितोचितः | भीम–असुर–शोणित–उचित (१.१) | accustomed to the blood of fearsome demons |
| पपौ | पपौ (√पा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | drank |
| अनास्वादितपूर्वम् | अनास्वादितपूर्व (२.१) | not tasted before |
| आशुगः | आशुग (१.१) | the swift-goer (arrow) |
| कुतूहलेन | कुतूहल (३.१) | out of curiosity |
| इव | इव | as if |
| मनुष्यशोणितम् | मनुष्य–शोणित (२.१) | human blood |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दि | ली | प | सू | नोः | स | बृ | ह | द्भु | जा | न्त | रं |
| प्र | वि | श्य | भी | मा | सु | र | शो | णि | तो | चि | तः |
| प | पा | व | ना | स्वा | दि | त | पू | र्व | मा | शु | गः |
| कु | तू | ह | ले | ने | व | म | नु | ष्य | शो | णि | तम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.