ततः प्रकोष्ठे हरिचन्दनाङ्किते
प्रमथ्यमानार्णवधीरनादिनीम् ।
रघुः शशाङ्कार्धमुखेन पत्रिणा
शरासनज्यामलुनाद्बिडौजसः ॥
ततः प्रकोष्ठे हरिचन्दनाङ्किते
प्रमथ्यमानार्णवधीरनादिनीम् ।
रघुः शशाङ्कार्धमुखेन पत्रिणा
शरासनज्यामलुनाद्बिडौजसः ॥
प्रमथ्यमानार्णवधीरनादिनीम् ।
रघुः शशाङ्कार्धमुखेन पत्रिणा
शरासनज्यामलुनाद्बिडौजसः ॥
अन्वयः
AI
ततः रघुः, हरिचन्दन-अङ्किते प्रकोष्ठे, शशाङ्क-अर्ध-मुखेन पत्रिणा बिडौजसः प्रमथ्यमान-अर्णव-धीर-नादिनीम् शरासन-ज्याम् अलुनात् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तत इति॥ ततो रघुर्हरिचन्दनाङ्किते प्रकोष्ठे मणिबन्धे प्रमथ्यमानार्णवधीरनादिनीं प्रमथ्यमानार्णव इव धीरं गम्भीरं नदतीति तां तथोक्ताम्। वेवेष्टि व्याप्नोतीति विट् व्यापकमोजो यस्य स तस्य बिडौजस इन्द्रस्य। पृषोदरादित्यात्साधुः। शरासनज्यां धनुर्मौर्वीम्। शशाङ्कस्यार्धः खण्ड इव मुकं फलं यस्य तेन पत्रिणाऽलुनादच्छिनत् ॥
Summary
AI
Then Raghu, with a crescent-headed arrow, cut the bowstring of Indra, which was resting on his forearm marked with yellow sandalwood paste and which resounded deeply like the churning ocean.
सारांश
AI
तब रघु ने अर्धचंद्राकार बाण से इंद्र की चंदन लगी कलाई पर बंधे धनुष की डोरी को काट दिया, जो समुद्र मंथन जैसी गंभीर ध्वनि कर रही थी।
पदच्छेदः
AI
| ततः | ततः | Then |
| प्रकोष्ठे | प्रकोष्ठ (७.१) | on the forearm |
| हरिचन्दनाङ्किते | हरिचन्दन–अङ्कित (७.१) | marked with yellow sandalwood paste |
| प्रमथ्यमानार्णवधीरनादिनीम् | प्रमथ्यमान–अर्णव–धीर–नादिनी (२.१) | (the bowstring) which had a deep sound like the churning ocean |
| रघुः | रघु (१.१) | Raghu |
| शशाङ्कार्धमुखेन | शशाङ्क–अर्ध–मुख (३.१) | with a crescent-moon-headed |
| पत्रिणा | पत्रिन् (३.१) | arrow |
| शरासनज्याम् | शरासन–ज्या (२.१) | the bowstring |
| अलुनात् | अलुनात् (√लू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | cut |
| बिडौजसः | बिडौजस् (६.१) | of Bidojas (Indra) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | प्र | को | ष्ठे | ह | रि | च | न्द | ना | ङ्कि | ते |
| प्र | म | थ्य | मा | ना | र्ण | व | धी | र | ना | दि | नीम् |
| र | घुः | श | शा | ङ्का | र्ध | मु | खे | न | प | त्रि | णा |
| श | रा | स | न | ज्या | म | लु | ना | द्बि | डौ | ज | सः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.