रघुर्भृशं वक्षसि तेन ताडितः
पपात भूमौ सह सैनिकाश्रुभिः ।
निमेषमात्रादवधूय च व्यथां
सहोत्थितः सैनिकहर्षनिस्वनैः ॥
रघुर्भृशं वक्षसि तेन ताडितः
पपात भूमौ सह सैनिकाश्रुभिः ।
निमेषमात्रादवधूय च व्यथां
सहोत्थितः सैनिकहर्षनिस्वनैः ॥
पपात भूमौ सह सैनिकाश्रुभिः ।
निमेषमात्रादवधूय च व्यथां
सहोत्थितः सैनिकहर्षनिस्वनैः ॥
अन्वयः
AI
तेन वक्षसि भृशम् ताडितः रघुः सैनिक-अश्रुभिः सह भूमौ पपात । च निमेषमात्रात् व्यथाम् अवधूय सैनिक-हर्ष-निस्वनैः सह उत्थितः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
रघुरिति॥ रघुस्तेन वज्रेण भृशमत्यर्थं वक्षसि ताडितो हतः सन् । सैनिकानामश्रुभिः सह भूमौ पपात। तस्मिन्पतिते ते रुरुदुरित्यर्थः। निमेषमात्राद्व्यथां दुःखमवधूय तिरस्कृत्य सैनिकानां हर्षेण ये निस्वनाः क्ष्वेडास्तैः सहोत्थितश्च। तस्मिन्नुत्थिते हर्षात्सिंहनादांश्चक्रुरित्यर्थः॥
Summary
AI
Struck heavily on the chest by it (the Vajra), Raghu fell to the ground along with the tears of his soldiers. And, in just a moment, shaking off the pain, he rose up along with the joyous shouts of his soldiers.
सारांश
AI
इन्द्र द्वारा छाती पर भीषण प्रहार किए जाने पर रघु सैनिकों के आँसुओं के साथ भूमि पर गिर पड़े। किंतु एक क्षण में ही अपनी पीड़ा को भुलाकर वे सैनिकों के हर्षनाद के साथ पुनः उठ खड़े हुए।
पदच्छेदः
AI
| रघुः | रघु (१.१) | Raghu |
| भृशम् | भृशम् | heavily |
| वक्षसि | वक्षस् (७.१) | on the chest |
| तेन | तद् (३.१) | by it |
| ताडितः | ताडित (√तड्+क्त, १.१) | struck |
| पपात | पपात (√पत् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | fell |
| भूमौ | भूमि (७.१) | on the ground |
| सह | सह | with |
| सैनिकाश्रुभिः | सैनिक–अश्रु (३.३) | the tears of his soldiers |
| निमेषमात्रात् | निमेष–मात्र (५.१) | in the measure of a moment |
| अवधूय | अवधूय (अव√धू+ल्यप्) | having shaken off |
| च | च | and |
| व्यथाम् | व्यथा (२.१) | the pain |
| सह | सह | with |
| उत्थितः | उत्थित (उद्√स्था+क्त, १.१) | rose up |
| सैनिकहर्षनिस्वनैः | सैनिक–हर्ष–निस्वन (३.३) | the joyous shouts of his soldiers |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र | घु | र्भृ | शं | व | क्ष | सि | ते | न | ता | डि | तः |
| प | पा | त | भू | मौ | स | ह | सै | नि | का | श्रु | भिः |
| नि | मे | ष | मा | त्रा | द | व | धू | य | च | व्य | थां |
| स | हो | त्थि | तः | सै | नि | क | ह | र्ष | नि | स्व | नैः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.