तमभ्यनन्दत्प्रथमं प्रबोधितः
प्रजेश्वरः शासनहारिणा हरेः ।
परामृशन्हर्षजडेन पाणिना
तदीयमङ्गं कुलिशव्रणाङ्कितम् ॥
तमभ्यनन्दत्प्रथमं प्रबोधितः
प्रजेश्वरः शासनहारिणा हरेः ।
परामृशन्हर्षजडेन पाणिना
तदीयमङ्गं कुलिशव्रणाङ्कितम् ॥
प्रजेश्वरः शासनहारिणा हरेः ।
परामृशन्हर्षजडेन पाणिना
तदीयमङ्गं कुलिशव्रणाङ्कितम् ॥
अन्वयः
AI
हरेः शासन-हारिणा प्रथमम् प्रबोधितः प्रजा-ईश्वरः, हर्ष-जडेन पाणिना तदीयम् कुलिश-व्रण-अङ्कितम् अङ्गम् परामृशन् तम् अभ्यनन्दत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तमिति॥ हरेरिन्द्रस्य शासनहारिणा पुरुषेण प्रथमं प्रबोधितो ज्ञापितः। वृत्तान्तमिति शेषः। प्रजेश्वरो दिलीपो हर्षजडेन हर्षजडेन हर्षशिशिरेण पाणिना कुलिशव्रणाङ्कितम्। तस्य रघोरिदं तदीयम्। अङ्गं शरीरं परामृशन्, तं रघुमभ्यनन्दत् ॥
Summary
AI
The lord of subjects (King Dilipa), having been first informed by Indra's messenger, congratulated him (Raghu). He did so while stroking with a hand numb with joy Raghu's body, which was marked with the wound from the thunderbolt.
सारांश
AI
इन्द्र के दूत द्वारा पहले ही सूचित किए गए राजा दिलीप ने हर्ष से गद्गद होकर, वज्र के घावों से अंकित रघु के अंगों को अपने हाथों से स्पर्श करते हुए उनका अभिनंदन किया।
पदच्छेदः
AI
| तम् | तद् (२.१) | him |
| अभ्यनन्दत् | अभ्यनन्दत् (अभि√नन्द् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | congratulated |
| प्रथमम् | प्रथमम् | first |
| प्रबोधितः | प्रबोधित (प्र√बुध्+णिच्+क्त, १.१) | informed |
| प्रजेश्वरः | प्रजा–ईश्वर (१.१) | the lord of subjects (King Dilipa) |
| शासनहारिणा | शासनहारिन् (३.१) | by the messenger |
| हरेः | हरि (६.१) | of Hari (Indra) |
| परामृशन् | परामृशत् (परा√मृश्+शतृ, १.१) | touching |
| हर्षजडेन | हर्ष–जड (३.१) | numb with joy |
| पाणिना | पाणि (३.१) | with his hand |
| तदीयम् | तदीय (२.१) | his |
| अङ्गम् | अङ्ग (२.१) | body |
| कुलिशव्रणाङ्कितम् | कुलिश–व्रण–अङ्कित (२.१) | marked with the wound of the thunderbolt |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | म | भ्य | न | न्द | त्प्र | थ | मं | प्र | बो | धि | तः |
| प्र | जे | श्व | रः | शा | स | न | हा | रि | णा | ह | रेः |
| प | रा | मृ | श | न्ह | र्ष | ज | डे | न | पा | णि | ना |
| त | दी | य | म | ङ्गं | कु | लि | श | व्र | णा | ङ्कि | तम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.