अथ स विषयव्यावृत्तात्मा यथाविधि सूनवे
नृपतिककुदं दत्त्वा यूने सितातपवारणम् ।
मुनिवनतरुच्छायां देव्या तया सह शिश्रिये
गलितवयसामिक्ष्वाकूणामिदं हि कुलव्रतम् ॥
अथ स विषयव्यावृत्तात्मा यथाविधि सूनवे
नृपतिककुदं दत्त्वा यूने सितातपवारणम् ।
मुनिवनतरुच्छायां देव्या तया सह शिश्रिये
गलितवयसामिक्ष्वाकूणामिदं हि कुलव्रतम् ॥
नृपतिककुदं दत्त्वा यूने सितातपवारणम् ।
मुनिवनतरुच्छायां देव्या तया सह शिश्रिये
गलितवयसामिक्ष्वाकूणामिदं हि कुलव्रतम् ॥
अन्वयः
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अथ विषय-व्यावृत्त-आत्मा सः (दिलीपः) यूने सूनवे नृपति-ककुदम् सित-आतप-वारणम् यथाविधि दत्त्वा, तया देव्या सह मुनि-वन-तरु-छायाम् शिश्रिये । हि इदम् गलित-वयसाम् इक्ष्वाकूणाम् कुल-व्रतम् (अस्ति) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अथेति॥ अथ विषयेभ्यो व्यावृत्तात्मा निवृत्तचितः स दिलीपो यथाविधि यथाशास्त्त्रं यूने सूनवे नृपतिककुदं राजचिह्नम्।
ककुद्वत्ककुदं श्रेष्ठे वृषाङ्के राजलक्ष्मणि इति विश्वः। सितातपवारणं श्वेतच्छत्रं दत्त्वा तया देव्या सुदक्षिणया सह मुनिवनतरोश्छायां शिश्रिये श्रितवान्। वानप्रस्थाश्रमं स्वीकृतवानित्यर्थः। तथा हि-गलितवयसां वृद्धानामिक्ष्वाकूणामिक्ष्वाकोर्गोत्रापत्यानाम्। तद्राजसंज्ञकत्वादणो लुक्। इदं वनगमनं कुलव्रतम्। देव्या सह इत्यनेन सपत्नीकवानप्रस्थाश्रमपक्ष उक्तः। तथा च याज्ञवल्क्यः(प्राय.३।४५)- सुतविन्यस्तपत्नीकस्तया वाऽनुगतो वनम्। वानप्रस्थो ब्रह्मचारी साग्निः सोपासनो व्रजेत्॥ इति। हरिणीवृत्तमेतत्। तदुक्तम्-रसयुगहयैर्न्सौ म्रौ स्लौ गो यदा हरिणी तदा इति॥
Summary
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Then, King Dilipa, his soul turned away from worldly objects, duly gave the royal insignia, the white parasol, to his young son. Along with his queen Sudakshina, he resorted to the shade of the trees in the sages' forest. For this is indeed the family vow of the Ikshvakus in their old age.
सारांश
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तत्पश्चात् विषयों से विरक्त राजा दिलीप ने युवा पुत्र रघु को राजचिह्न श्वेत छत्र सौंपकर, रानी सुदक्षिणा के साथ मुनियों के तपोवन की छाया का आश्रय लिया; क्योंकि वृद्धावस्था में इक्ष्वाकु वंश का यही कुल-व्रत है।
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | Then |
| सः | तद् (१.१) | he |
| विषयव्यावृत्तात्मा | विषय–व्यावृत्त–आत्मन् (१.१) | one whose soul is turned away from worldly objects |
| यथाविधि | यथाविधि | according to the rule |
| सूनवे | सूनु (४.१) | to his son |
| नृपतिककुदम् | नृपति–ककुद (२.१) | the royal insignia |
| दत्त्वा | दत्त्वा (√दा+क्त्वा) | having given |
| यूने | युवन् (४.१) | the young |
| सितातपवारणम् | सित–आतपवारण (२.१) | the white parasol |
| मुनिवनतरुच्छायाम् | मुनि–वन–तरु–छाया (२.१) | the shade of the trees in the sages' forest |
| देव्या | देवी (३.१) | with the queen |
| तया | तद् (३.१) | that |
| सह | सह | along with |
| शिश्रिये | शिश्रिये (√श्रि कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | resorted to |
| गलितवयसाम् | गलितवयस् (६.३) | of those whose age has passed |
| इक्ष्वाकूणाम् | इक्ष्वाकु (६.३) | of the Ikshvakus |
| इदम् | इदम् (१.१) | This |
| हि | हि | indeed |
| कुलव्रतम् | कुल–व्रत (१.१) | is the family vow |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | स | वि | ष | य | व्या | वृ | त्ता | त्मा | य | था | वि | धि | सू | न | वे |
| नृ | प | ति | क | कु | दं | द | त्त्वा | यू | ने | सि | ता | त | प | वा | र | णम् |
| मु | नि | व | न | त | रु | च्छा | यां | दे | व्या | त | या | स | ह | शि | श्रि | ये |
| ग | लि | त | व | य | सा | मि | क्ष्वा | कू | णा | मि | दं | हि | कु | ल | व्र | तम् |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
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