अन्वयः
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दिलीपानन्तरम् राज्ये प्रतिष्ठितम् तम् निशम्य, राज्ञाम् हृदये पूर्वम् प्रधूमितः अग्निः इव उत्थितः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
दिलीपेति॥ दिलीपानन्तरं राज्ये प्रतिष्ठितमवस्थितं तं रघुं निशम्याकर्ण्यं पूर्वं दिलीपकाले राज्ञां हृदये प्रकर्षेण धूमोऽस्य संजातः प्रधूमितोऽग्निः संतापाग्निरुत्थित इव प्रज्वलित इव। पूर्वाभ्यधिकः संतापोऽभूदित्यर्थः। राजकर्तृकस्यापि निशमनस्याग्नावुपचारान्न समानकर्तृकत्वविरोधः ॥
Summary
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Hearing that Raghu was firmly established in the kingdom after Dilipa, the fire of jealousy, which was previously just smouldering in the hearts of other kings, now flared up.
सारांश
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दिलीप के बाद रघु को सिंहासन पर बैठा सुनकर शत्रु राजाओं के मन में पहले से सुलग रही ईर्ष्या की अग्नि धधक उठी।
पदच्छेदः
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| दिलीपानन्तरम् | दिलीपानन्तरम् | After Dilipa |
| राज्ये | राज्य (७.१) | in the kingdom |
| तम् | तत् (२.१) | him |
| निशम्य | निशम्य (नि√शम्+ल्यप्) | having heard |
| प्रतिष्ठितम् | प्रतिष्ठित (प्रति√स्था+क्त, २.१) | established |
| पूर्वम् | पूर्व | previously |
| प्रधूमितः | प्रधूमित (प्र√धूम्+क्त, १.१) | smouldering |
| राज्ञाम् | राजन् (६.३) | of the kings |
| हृदये | हृदय (७.१) | in the heart |
| अग्निः | अग्नि (१.१) | fire |
| इव | इव | like |
| उत्थितः | उत्थित (उद्√स्था+क्त, १.१) | arose |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दि | ली | पा | न | न्त | रं | रा | ज्ये |
| तं | नि | श | म्य | प्र | ति | ष्ठि | तम् |
| पू | र्वं | प्र | धू | मि | तो | रा | ज्ञां |
| हृ | द | ये | ऽग्नि | रि | वो | त्थि | तः |
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