अन्वयः
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इक्षुच्छायनिषादिन्यः शालिगोप्यः तस्य गोप्तुः गुणोदयम् आकुमारकथोद्घातम् यशः जगुः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
इक्ष्विति॥ इक्षूणां छायेक्षुच्छायम्।
छाया बाहुल्ये (अष्टाध्यायी २.४.२२ ) इति नपुंसकत्वम्; तत्र निषण्णा इक्षुच्छायनिषादिन्यः। इक्षुच्छायानिषादिन्यः इति स्त्त्रीलिङ्गपाठ इक्षोश्छायेति विग्रहः; अन्यथा बहुत्वे नपुंसकत्वप्रसङ्गात्। शालीन् गोपायन्ति रक्षन्तीति शालिगोप्यः सस्यपालिकाः स्त्त्रियः। कर्मण्यण् (अष्टाध्यायी ३.२.१ ) । टिड्ढाणञ- (अष्टाध्यायी ४.१.१५ ) इत्यादिना ङीप्। गोप्तू रक्षकस्य तस्य रघोः। गुणेभ्य उदयो यस्य तद्गुणोदयं गुणोत्पन्नमाकुमारं कुमारादारभ्य कथोद्घातः कथारम्भो यस्य तम्। कुमारैरपि स्तूयमानमित्यर्थः। यशो जगुर्गायन्ति स्म। अथवा, -कुमारस्य सतो रघोर्याः कथा इन्द्रविजयादयस्तत यशो जगुर्गायन्ति स्म। अथवा, -कुमारस्य सतो रघोर्याः कथा इन्द्रविजयादयस्तत आरभ्याकुमारकथम्। तत्राप्यभिविधावव्ययीभावः। आकुमारकथमुद्घातो यस्मिन् कर्मणि। गानकियाविशेषणमेतत्। स्यादभ्यादानमुद्घात आरम्भः इत्यमरः। आकुमारकथोद्भूतम् इति पाठे कुमारस्य सतस्तस्य कथभिश्चरितैरुद्भूतं यद्यशस्तद्यश आरभ्य यशो जगुरिति व्याख्येयम् ॥
Summary
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The female guardians of the paddy fields, resting in the shade of sugarcane plants, sang of the protector Raghu's fame and the rise of his virtues, including anecdotes from his very boyhood.
सारांश
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गन्ने की छाया में बैठी धान की रखवाली करने वाली स्त्रियाँ रघु के बचपन से लेकर अब तक के यश और गुणों का गान करने लगीं।
पदच्छेदः
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| इक्षुच्छायनिषादिन्यः | इक्षु–छाया–निषादिन् (१.३) | women sitting in the shade of sugarcane |
| तस्य | तत् (६.१) | his |
| गोप्तुः | गोप्तृ (६.१) | of the protector |
| गुणोदयम् | गुण–उदय (२.१) | the rise of his virtues |
| आकुमारकथोद्घातम् | आकुमार–कथा–उद्घात (२.१) | including the tales of his boyhood |
| शालिगोप्यः | शालि–गोपी (१.३) | the female guardians of the paddy fields |
| जगुः | जगुः (√गै कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | sang |
| यशः | यशस् (२.१) | the fame |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | क्षु | च्छा | य | नि | षा | दि | न्य |
| स्त | स्य | गो | प्तु | र्गु | णो | द | यम् |
| आ | कु | मा | र | क | थो | द्घा | तं |
| शा | लि | गो | प्यो | ज | गु | र्य | शः |
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