अन्वयः
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मद-उदग्राः ककुद्मन्तः सरिताम् कूल-मुद्रुजाः महा-उक्षाः तस्य विक्रमम् लीला-खेलम् अनुप्रापुः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
मदेति॥ मदोदग्रा मदोद्घाताः। ककुदेषामस्तीति ककुद्मन्तः। महाककुद इत्यर्थः। यवादित्वान्मकारस्य वत्वाभावः। सरितां कूलान्युद्रुजन्तीति कूलमुद्रुजाः।
उदि कूले रुजिवहोः (अष्टाध्यायी ३.२.३१ ) इति खश्प्रत्ययः। अरुर्द्विषद्- (अष्टाध्यायी ६.३.६७ ) इत्यादिना मुमागमः। महन्त उक्षाणो महोक्षाः। अचतुर- (अष्टाध्यायी ५.४.७७ ) इत्यादिना निपातनादकारान्तः। लीलाखेलं विलाससुभगं तस्य रघोरुत्साहवतो वपुष्मतः परभञ्जकस्य विक्रमं शौर्यम्। अनुप्रापुरनुचक्रुः॥
Summary
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Great bulls, arrogant with rut, with their large humps, breaking the river banks, imitated Raghu's powerful stride with playful ease.
सारांश
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नदियों के तटों को तोड़ने वाले और मदमत्त ककुदधारी विशाल बैल अपनी क्रीड़ाओं में राजा रघु के पराक्रम का अनुकरण कर रहे थे।
पदच्छेदः
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| मदोदग्राः | मद–उदग्र (१.३) | arrogant with rut |
| ककुद्मन्तः | ककुद्मत् (१.३) | humped |
| सरिताम् | सरित् (६.३) | of the rivers |
| कूलमुद्रुजाः | कूल–उद्रुज् (१.३) | breaking the banks |
| लीलाखेलम् | लीलाखेल (२.१) | with playful ease |
| अनुप्रापुः | अनुप्रापुः (अनु√आप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | imitated |
| महोक्षाः | महत्–उक्षन् (१.३) | great bulls |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| विक्रमम् | विक्रम (२.१) | prowess |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | दो | द | ग्राः | क | कु | द्म | न्तः |
| स | रि | तां | कू | ल | मु | द्रु | जाः |
| ली | ला | खे | ल | म | नु | प्रा | पु |
| र्म | हो | क्षा | स्त | स्य | वि | क्र | मम् |
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