अवाकिरन्वयोवृद्धास्तं लाजैः पौरयोषितः ।
पृषतैर्मन्दरोद्धूतैः क्षीरोर्मय इवाच्युतम् ॥

अन्वयः AI वयः-वृद्धाः पौर-योषितः, मन्दर-उद्धूतैः पृषतैः क्षीर-ऊर्मयः अच्युतम् इव, तम् लाजैः अवाकिरन् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) अवाकिरन्निति॥ वयोवृद्धाः पौरयौषितस्तं रघुं प्रयान्तं लाजैराचारलाजैः। मन्दरोद्धूतैः पृषतैर्बिन्दुभिः क्षीरोर्मयः क्षीरसमुद्रोर्मयोऽच्युतं विष्णुमिव। अवाकिरन् पर्यक्षिपन्॥
Summary AI The elderly women of the city scattered parched grains upon him, just as the waves of the milk ocean, churned by Mount Mandara, showered drops upon Achyuta (Vishnu).
सारांश AI नगर की वृद्ध महिलाओं ने रघु पर लाजों की वर्षा उसी प्रकार की, जैसे मन्दराचल से मथे जाते समय क्षीरसागर की लहरों ने विष्णु पर जलकण बरसाए थे।
पदच्छेदः AI
अवाकिरन्अवाकिरन् (अव√कॄ कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) scattered
वयोवृद्धाःवयस्वृद्ध (१.३) elderly
तम्तद् (२.१) him
लाजैःलाज (३.३) with parched grains
पौरयोषितःपुरयोषित् (१.३) the women of the city
पृषतैःपृषत (३.३) with drops
मन्दरोद्धूतैःमन्दरउद्धूत (३.३) churned by Mandara mountain
क्षीरोर्मयःक्षीरऊर्मि (१.३) the waves of the milk ocean
इवइव like
अच्युतम्अच्युत (२.१) Achyuta (Vishnu)
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
वा कि न्व यो वृ द्धा
स्तं ला जैः पौ यो षि तः
पृ तै र्म न्द रो द्धू तैः
क्षी रो र्म वा च्यु तम्
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.