अन्वयः
AI
उत्खात-प्रतिरोपिताः ते (वङ्गाः) आ-पाद-पद्म-प्रणताः (सन्तः), कलमाः इव, फलैः रघुम् संवर्धयामासुः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
आपादेति॥ आपादपद्ममङ्घ्रिपम्दपर्यन्तं प्रणताः। अत एव, उत्खाताः पूर्वमुद्धृता अपि प्रतिरोपिताः पश्चात्स्थापितास्ते वङ्गाः। कलमा इव शालिविशेषा इव।
शालयः कलमाद्याश्च षष्टिकाद्याश्च पुंस्यमी इत्यमरः (अमरकोशः २.९.२५ ) । तेऽप्यापादपद्मं पादपद्ममूलपर्यन्तं प्रणताः। पादो बुध्ने तुरीयांशशैलप्रत्यन्तपर्वताःइति विश्वः। उत्खातप्रतिरोपिताश्च। रघुं फलैर्धनैः। अन्यत्र, -सस्यैः। संवर्धयामासुः। फलं फले धने बीजे निष्पत्तौ भोगलाभयोः। सस्ये इति केशवः॥
Summary
AI
Those Vanga kings, having been uprooted and then reinstated, bowed down to Raghu's lotus feet and honored him with tributes, just like rice stalks that, after being transplanted, bend down with the weight of their grains.
सारांश
AI
उखाड़कर पुनः रोपे गए धान की भाँति, रघु द्वारा पदच्युत कर पुनः स्थापित किए गए राजाओं ने चरणों में झुककर उन्हें उपहारों से समृद्ध किया।
पदच्छेदः
AI
| आपादपद्मप्रणताः | आ–पादपद्म–प्रणत (१.३) | bowing down to his lotus feet |
| कलमाः | कलम (१.३) | rice stalks |
| इव | इव | like |
| ते | तद् (१.३) | They |
| रघुम् | रघु (२.१) | Raghu |
| फलैः | फल (३.३) | with fruits (tributes) |
| संवर्धयामासुः | संवर्धयामासुः (सम्√वृध् +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | honored |
| उत्खातप्रतिरोपिताः | उत्खात–प्रतिरोपित (१.३) | uprooted and replanted |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | पा | द | प | द्म | प्र | ण | ताः |
| क | ल | मा | इ | व | ते | र | घुम् |
| फ | लैः | सं | व | र्ध | या | मा | सु |
| रु | त्खा | त | प्र | ति | रो | पि | ताः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.