अन्वयः
AI
त्रिपदी-छेदिनाम् अपि करिणाम् चन्दनानाम् भोगि-वेष्टन-मार्गेषु समर्पितम् ग्रैवम् न अस्रसत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
भोगीति॥ चन्दनानां चन्दनद्रुमाणां भोगिवेष्टनमार्गेषु सर्पवेष्टनान्निम्रेषु समर्पितं सञ्जितं त्रिपदीच्छेदिनां पादशृङ्खलच्छेदकानामपि।
ग्रीवाभ्योऽण्च (अष्टाध्यायी ४.३.५७ ) इत्यण्प्रत्ययः। नास्रसन्न स्रस्तमभूत्। द्युद्भ्यो लुङि (अष्टाध्यायी १.३.९१ ) इति परस्मैपदम्। पुषादित्वादङ्। अनिदिताम्- (अष्टाध्यायी ६.४.२४ ) इति नकारलोपः॥
Summary
AI
The neck-chains of the elephants, though they were strong enough to break their three-legged fetters, did not slip off, as they were firmly lodged in the grooves on the sandalwood trees made by the coiling of serpents.
सारांश
AI
हाथियों की गर्दन की जंजीरें चंदन के वृक्षों पर सर्पों के निशान वाली दरारों में ऐसी फँसीं कि सांकल तोड़ने वाले हाथियों के बल से भी वे नहीं खिसकीं।
पदच्छेदः
AI
| भोगि-वेष्टन-मार्गेषु | भोगिन्–वेष्टन–मार्ग (७.३) | in the tracks of the coils of serpents |
| चन्दनानाम् | चन्दन (६.३) | on the sandalwood trees, |
| समर्पितम् | समर्पित (सम्√ऋ+णिच्+क्त, १.१) | placed/fastened |
| न | न | not |
| अस्रसत् | अस्रसत् (√स्रंस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | did slip off |
| करिणाम् | करिन् (६.३) | of the elephants, |
| ग्रैवम् | ग्रैव (१.१) | the neck-chain, |
| त्रिपदी-छेदिनाम् | त्रिपदी–छेदिन् (६.३) | of those who can break the three-legged fetters, |
| अपि | अपि | even. |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भो | गि | वे | ष्ट | न | मा | र्गे | षु |
| च | न्द | ना | नां | स | म | र्पि | तम् |
| ना | स्र | स | त्क | रि | णां | ग्रै | वं |
| त्रि | प | दी | च्छे | दि | ना | म | पि |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.