अन्वयः
AI
ततः संयमी तत्त्वज्ञानेन इन्द्रिय-आख्यान् रिपून् इव (जेतुम्), (सः) स्थलवर्त्मना पारसीकान् जेतुम् प्रतस्थे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
पारसीकानिति॥ ततः स रघुः। संयमी योगी तत्त्वज्ञानेनेन्द्रियाख्यानिन्द्रियनामकान् रिपूनिव। पारसीकान् राज्ञो जेतुं स्थलवर्त्मना प्रतस्थे। न तु नेदिष्टेनापि जलपथेन। समुद्रयानस्य निषिद्धत्वादिति भावः ॥
Summary
AI
Then, Raghu set out by the land route to conquer the Persians, just as a self-controlled ascetic sets out to conquer his enemies called the senses through the knowledge of reality.
सारांश
AI
जिस प्रकार एक संयमी पुरुष तत्वज्ञान से इंद्रियों को जीतता है, वैसे ही रघु स्थल मार्ग से पारसी शत्रुओं को जीतने के लिए प्रस्थित हुए।
पदच्छेदः
AI
| पारसीकान् | पारसीक (२.३) | the Persians |
| ततः | ततः | Then, |
| जेतुम् | जेतुम् (√जि+तुमुन्) | to conquer, |
| प्रतस्थे | प्रतस्थे (प्र√स्था कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | he set out |
| स्थलवर्त्मना | स्थलवर्त्मन् (३.१) | by the land route, |
| इन्द्रिय-आख्यान् | इन्द्रिय–आख्य (२.३) | called the senses |
| इव | इव | like |
| रिपून् | रिपु (२.३) | the enemies |
| तत्त्वज्ञानेन | तत्त्व–ज्ञान (३.१) | by the knowledge of reality |
| संयमी | संयमिन् (१.१) | a self-controlled ascetic. |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पा | र | सी | कां | स्त | तो | जे | तुं |
| प्र | त | स्थे | स्थ | ल | व | र्त्म | ना |
| इ | न्द्रि | या | ख्या | नि | व | रि | पूं |
| स्त | त्त्व | ज्ञा | ने | न | सं | य | मी |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.