अन्वयः
AI
सः तेषां भल्लापवर्जितैः श्मश्रुलैः शिरोभिः महीम् तस्तार, सरघाव्याप्तैः क्षौद्रपटलैः इव।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
भल्लेति॥ स रघुर्भल्लापवलर्जितैर्बाणविशेषकृत्तैः।
स्नुहीदलफलो भल्लः इति यादवः। श्मश्रुलैः प्रवृद्धमुखरोमवद्भिः। सिध्मादिभ्यश्च (अष्टाध्यायी ५.२.९७ ) इति लच्प्रत्ययः। तेषां पाश्चात्त्यानां शिरोभिः। सरघाभिर्मधुमक्षिकाभिर्व्याप्तैः। सरघा मधुमक्षिका इत्यमरः (अमरकोशः २.५.२९ ) । क्षुद्राः सरघाः। क्षुद्रा व्यङ्गा नटी वेश्या सरघा कण्टकारिका इत्यमरशाश्वतौ। क्षुद्राभिः कृतानि क्षौद्राणि मधूनि। मधु क्षौद्रं माक्षिकादि इत्यमरः (अमरकोशः २.९.१०७ ) । क्षुद्राभअरमरवटरपादपादञ् (अष्टाध्यायी ४.३.११९ ) इति संज्ञायामञ्प्रत्ययः। तेषां पटलैः स्तबकैरिव। पटलं तिलके नेत्ररोगे छन्दसि संचये। पटिके परिवारे च इति हैमः। महीं तस्ताराच्छादयामास ॥
Summary
AI
He (Raghu) covered the earth with their bearded heads, severed by broad-headed arrows, as if with clusters of honeycombs swarming with bees.
सारांश
AI
रघु ने शत्रुओं के दाढ़ी वाले कटे हुए सिरों से पृथ्वी को इस प्रकार पाट दिया, जैसे मधुमक्खियों से घिरे हुए शहद के छत्ते बिखरे हों।
पदच्छेदः
AI
| भल्लापवर्जितैः | भल्ल–अपवर्जित (३.३) | by those severed by broad-headed arrows |
| तेषाम् | तद् (६.३) | their |
| शिरोभिः | शिरस् (३.३) | with heads |
| श्मश्रुलैः | श्मश्रुल (३.३) | bearded |
| महीम् | मही (२.१) | the earth |
| तस्तार | तस्तार (√स्तृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | covered |
| सरघाव्याप्तैः | सरघा–व्याप्त (३.३) | swarmed by honey-bees |
| सः | तद् (१.१) | he |
| क्षौद्रपटलैः | क्षौद्र–पटल (३.३) | with clusters of honeycombs |
| इव | इव | like |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | ल्ला | प | व | र्जि | तै | स्ते | षां |
| शि | रो | भिः | श्म | श्रु | लै | र्म | हीम् |
| त | स्ता | र | स | र | घा | व्या | प्तैः |
| स | क्षौ | द्र | प | ट | लै | रि | व |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.