कामरूपेश्वरस्तस्य हेमपीठाधिदेवताम् ।
रत्नपुष्पोपहारेण छायामानर्च पादयोः ॥

अन्वयः AI कामरूपेश्वरः रत्नपुष्पोपहारेण तस्य पादयोः छायाम् हेमपीठाधिदेवताम् (इव) आनर्च।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) कामरूपेश्वर इति॥ कामरूपेश्वरो हेमपीठस्याधिदेवतां तस्य रघोः पादयोश्छायां कनकमयपादपीठव्यापिनीं कान्तिं रत्नान्येव पुष्पाणि तेषामुपहारेण समर्पणेनानर्चार्चयामास ॥
Summary AI The king of Kamarupa, with offerings of jewel-flowers, worshipped the shadow of Raghu's feet as if it were the presiding deity of a golden throne.
सारांश AI कामरूपेश्वर ने रघु के सुवर्ण सिंहासन के पादपीठ पर स्थित उनके चरणों की छाया की रत्नमयी पुष्पों के उपहार से उसी प्रकार पूजा की जैसे अधिष्ठातृ देवता की जाती है।
पदच्छेदः AI
कामरूपेश्वरःकामरूपईश्वर (१.१) The lord of Kamarupa
तस्यतद् (६.१) his (Raghu's)
हेमपीठाधिदेवताम्हेमपीठअधिदेवता (२.१) the presiding deity of a golden throne
रत्नपुष्पोपहारेणरत्नपुष्पउपहार (३.१) with an offering of jewel-flowers
छायाम्छाया (२.१) the shadow
आनर्चआनर्च (√अर्च कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) worshipped
पादयोःपाद (६.२) of the two feet
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
का रू पे श्व स्त स्य
हे पी ठा धि दे ताम्
त्न पु ष्पो हा रे
छा या मा र्च पा योः
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