तमध्वरे विश्वजिति क्षितीशं
निःशेषविश्राणितकोशजातम् ।
उपात्तविद्यो गुरुदक्षिणार्थी
कौत्सः प्रपेदे वरतन्तुशिष्यः ॥
तमध्वरे विश्वजिति क्षितीशं
निःशेषविश्राणितकोशजातम् ।
उपात्तविद्यो गुरुदक्षिणार्थी
कौत्सः प्रपेदे वरतन्तुशिष्यः ॥
निःशेषविश्राणितकोशजातम् ।
उपात्तविद्यो गुरुदक्षिणार्थी
कौत्सः प्रपेदे वरतन्तुशिष्यः ॥
अन्वयः
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वरतन्तुशिष्यः उपात्तविद्यः गुरुदक्षिणार्थी कौत्सः विश्वजिति अध्वरे निःशेषविश्राणितकोशजातम् तम् क्षितीशम् प्रपेदे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तमिति॥ विश्वजिति विश्वजिन्नाम्र्यध्वरे यज्ञे।
यज्ञः सवोऽध्वरो यागः इत्यमरः (अमरकोशः २.७.१५ ) । निःशेषं विश्राणितं दत्तम्। श्रण दानेचुरादिः। कोशानामर्थराशीनां जातं समूहो येन तं तथोक्तम्। कोशोऽस्त्त्री कुड्भले खङ्गपिधानेऽर्यौघदिव्ययोः इत्यमरः (अमरकोशः २.७.१५ ) । जातं जनिसमूहयोः इति शाश्वतः। एतेन कौत्सस्यानवसरप्राप्तिं सूचयति। त्तं क्षितीशं रघुमुपात्तविद्यो लब्धविद्यो वरतन्तोः शिष्यः कौत्सः। ऋष्यन्धक- (अष्टाध्यायी ४.१.११४ ) इत्यण्। इञोऽपवादः। गुरुदक्षिणार्थी। पुष्करादिभ्यो देशे (अष्टाध्यायी ५.२.१३५ ) इत्यत्रार्थाञ्चासंनिहिते तदन्ताञ्चेतीनेः। अप्रत्याख्येय इति भावः। प्रपेदे प्राप। अस्मिन्सर्गे वृत्तमुपजातिः। तल्लक्षणं तु-स्यादिन्द्रवज्रा यदि तौ जगौ गः। उपेन्द्रवज्रा जतजास्ततो गौ। अनन्तरोदीरितलक्ष्मभाजौ पादौ यदीथावुपजातयस्ताः इति॥
Summary
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Kautsa, the disciple of Varatantu, having completed his studies and now seeking to pay the fee to his teacher, approached King Raghu during the Vishvajit sacrifice, at a time when the king had given away his entire treasury.
सारांश
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विश्वजित् यज्ञ में अपना सारा कोष दान कर देने वाले राजा रघु के पास शिक्षा पूर्ण कर गुरुदक्षिणा की इच्छा रखने वाले महर्षि वरतन्तु के शिष्य कौत्स पहुँचे।
पदच्छेदः
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| तम् | तद् (२.१) | him |
| अध्वरे | अध्वर (७.१) | in the sacrifice |
| विश्वजिति | विश्वजित् (७.१) | in the Vishvajit |
| क्षितीशम् | क्षितीश (२.१) | the lord of the earth |
| निःशेषविश्राणितकोशजातम् | निःशेष–विश्राणित (वि√श्रण्+णिच्+क्त)–कोश–जात (२.१) | one whose entire collection of treasury was given away |
| उपात्तविद्यः | उपात्त (उप+आ√दा+क्त)–विद्या (१.१) | one who has acquired knowledge |
| गुरुदक्षिणार्थी | गुरु–दक्षिणा–अर्थिन् (१.१) | one desirous of (paying) the teacher's fee |
| कौत्सः | कौत्स (१.१) | Kautsa |
| प्रपेदे | प्रपेदे (प्र√पद् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | approached |
| वरतन्तुशिष्यः | वरतन्तु–शिष्य (१.१) | the disciple of Varatantu |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | म | ध्व | रे | वि | श्व | जि | ति | क्षि | ती | शं |
| निः | शे | ष | वि | श्रा | णि | त | को | श | जा | तम् |
| उ | पा | त्त | वि | द्यो | गु | रु | द | क्षि | णा | र्थी |
| कौ | त्सः | प्र | पे | दे | व | र | त | न्तु | शि | ष्यः |
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