भक्तिः प्रतीक्ष्येषु कुलोचिता ते
पूर्वान्महाभाग तयातिशेषे ।
व्यतीतकालस्त्वहमभ्युपेत-
स्त्वामर्थिभावादिति मे विषादः ॥
भक्तिः प्रतीक्ष्येषु कुलोचिता ते
पूर्वान्महाभाग तयातिशेषे ।
व्यतीतकालस्त्वहमभ्युपेत-
स्त्वामर्थिभावादिति मे विषादः ॥
पूर्वान्महाभाग तयातिशेषे ।
व्यतीतकालस्त्वहमभ्युपेत-
स्त्वामर्थिभावादिति मे विषादः ॥
अन्वयः
AI
महाभाग! प्रतीक्ष्येषु ते भक्तिः कुलोचिता अस्ति। तया त्वं पूर्वान् अतिशेषे। तु अहम् व्यतीतकालः सन् अर्थिभावात् त्वाम् अभ्युपेतः, इति मे विषादः अस्ति।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
भक्तिरिति॥ प्रतीक्ष्येषु पूज्येषु।
पूज्यः प्रतीक्ष्यः इत्यमरः (अमरकोशः ३.१.५ ) । भक्तिरनुरागविशेषस्ते तव कुलोचिता कुलाभ्यस्ता। अभ्यस्तेऽप्युचितं न्याय्यम् इति यादवः। हे महाभाग सार्वभौम! तया भक्त्या पूर्वानतिशेषेऽतिवर्तसे। किंतु सर्वत्र वार्तं चेत्तर्हि कथं खेदखिन्न इव दृश्यसेऽत आह-व्यतीतेति। अहं व्यतीतकालोऽतिक्रान्तकालः सन्नर्थिभावात्त्वामभ्युपेत इति मे मम विषादः ॥
Summary
AI
"O fortunate one! Your devotion towards the venerable is befitting of your lineage. By that, you surpass your ancestors. However, I have come to you as a supplicant at an inopportune time, when you have given away all your wealth; this is my sorrow."
सारांश
AI
बड़ों का सम्मान आपके कुल की विशेषता है। मुझे दुःख है कि मैं अपनी याचना लेकर आपके पास ऐसे समय आया हूँ जब आप अपना सर्वस्व दान कर चुके हैं।
पदच्छेदः
AI
| भक्तिः | भक्ति (१.१) | Devotion |
| प्रतीक्ष्येषु | प्रतीक्ष्य (७.३) | towards the venerable |
| कुलोचिता | कुल–उचित (१.१) | befitting the lineage |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| पूर्वान् | पूर्व (२.३) | ancestors |
| महाभाग | महाभाग (८.१) | O fortunate one |
| तया | तद् (३.१) | by that |
| अतिशेषे | अतिशेषे (अति√शिष् कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | you surpass |
| व्यतीतकालः | व्यतीत–काल (१.१) | one whose time has passed (inopportune) |
| तु | तु | but |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| अभ्युपेतः | अभ्युपेत (अभि+उप√इ+क्त, १.१) | have approached |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | you |
| अर्थिभावात् | अर्थिन्–भाव (५.१) | out of the state of being a supplicant |
| इति | इति | this |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| विषादः | विषाद (१.१) | is the sorrow |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | क्तिः | प्र | ती | क्ष्ये | षु | कु | लो | चि | ता | ते |
| पू | र्वा | न्म | हा | भा | ग | त | या | ति | शे | षे |
| व्य | ती | त | का | ल | स्त्व | ह | म | भ्यु | पे | त |
| स्त्वा | म | र्थि | भा | वा | दि | ति | मे | वि | षा | दः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.