तदन्यतस्तावदनन्यकार्यो
गुर्वर्थमाहर्तुमहं यतिष्ये ।
स्वस्त्यस्तु ते निर्गलिताम्बुगर्भं
शरद्घनं नार्दति चातकोऽपि ॥
तदन्यतस्तावदनन्यकार्यो
गुर्वर्थमाहर्तुमहं यतिष्ये ।
स्वस्त्यस्तु ते निर्गलिताम्बुगर्भं
शरद्घनं नार्दति चातकोऽपि ॥
गुर्वर्थमाहर्तुमहं यतिष्ये ।
स्वस्त्यस्तु ते निर्गलिताम्बुगर्भं
शरद्घनं नार्दति चातकोऽपि ॥
अन्वयः
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तत् तावत् अनन्यकार्यः अहम् अन्यतः गुरु-अर्थम् आहर्तुं यतिष्ये। ते स्वस्ति अस्तु। चातकः अपि निर्गलित-अम्बु-गर्भं शरद्-घनं न अर्दति।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तदिति॥ तत्तस्मात्। तावदनन्यकार्यः।
यावत्तावञ्च साकल्येऽवधौ मानेऽवधारणे इति विश्वः। प्रयोजनान्तररहितोऽहमन्यतो वदान्यान्तराद्गुर्वर्थं गुरु-धनमाहर्तुमर्जयितुं यतिष्य उद्योक्ष्ये। ते तुभ्यं स्वस्ति शुभमस्तु। नमःस्वस्ति- (अष्टाध्यायी २.३.१६ ) इत्यादिना चतुर्थी। तथा हि-चातकोऽपि। धरणीपतितं तोयं चातकानां रुजाकरम् इतिहेतोरनन्यगतिकोऽपीत्यर्थः। निर्गलितोऽम्ब्वेव गर्भो यस्य तं शरद्धनं नार्दति न याचते। अर्द गतौ याचने च इति धातुः। याचनार्थे रणेऽर्दनम् इति यादवः ॥
Summary
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"Therefore, having no other task, I will now try to procure the fee for my guru from another source. May you be well. Even the Chataka bird does not pester an autumn cloud that has already shed its water."
सारांश
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अतः मैं गुरुदक्षिणा के लिए अन्यत्र प्रयत्न करूँगा। आपका कल्याण हो। रिक्त हो चुके शरद ऋतु के बादल से चातक भी याचना नहीं करता।
पदच्छेदः
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| तत् | तत् | Therefore |
| अन्यतः | अन्यतः | from another source |
| तावत् | तावत् | now |
| अनन्यकार्यः | अनन्य–कार्य (१.१) | having no other task |
| गुर्वर्थम् | गुरु–अर्थ (२.१) | for the guru's purpose |
| आहर्तुम् | आहर्तुम् (आ√हृ+तुमुन्) | to procure |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| यतिष्ये | यतिष्ये (√यत् कर्तरि लृट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | will strive |
| स्वस्ति | स्वस्ति | well-being |
| अस्तु | अस्तु (√अस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may there be |
| ते | युष्मद् (४.१) | to you |
| निर्गलिताम्बुगर्भम् | निर्गलित–अम्बु–गर्भ (२.१) | which has shed its water-contents |
| शरद्धनम् | शरद्–घन (२.१) | an autumn cloud |
| न | न | not |
| अर्दति | अर्दति (√अर्द कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | troubles |
| चातकः | चातक (१.१) | the Chataka bird |
| अपि | अपि | even |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द | न्य | त | स्ता | व | द | न | न्य | का | र्यो |
| गु | र्व | र्थ | मा | ह | र्तु | म | हं | य | ति | ष्ये |
| स्व | स्त्य | स्तु | ते | नि | र्ग | लि | ता | म्बु | ग | र्भं |
| श | र | द्घ | नं | ना | र्द | ति | चा | त | को | ऽपि |
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