निर्बन्धसंजातरुषार्थकार्श्य-
मचिन्तयित्वा गुरुणाहमुक्तः ।
वित्तस्य विद्यापरिसंख्यया मे
कोटीश्चतस्रो दश चाहरेति ॥
निर्बन्धसंजातरुषार्थकार्श्य-
मचिन्तयित्वा गुरुणाहमुक्तः ।
वित्तस्य विद्यापरिसंख्यया मे
कोटीश्चतस्रो दश चाहरेति ॥
मचिन्तयित्वा गुरुणाहमुक्तः ।
वित्तस्य विद्यापरिसंख्यया मे
कोटीश्चतस्रो दश चाहरेति ॥
अन्वयः
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निर्बन्ध-संजात-रुषा गुरुणा, मम अर्थकार्श्यम् अचिन्तयित्वा, अहम् उक्तः, "मे विद्या-परिसंख्यया वित्तस्य चतस्रः दश च कोटीः आहर" इति।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
निर्बन्धेति॥ निर्बन्धेन प्रार्थनातिशयेन संजातरुषा संजातक्रोधेन गुरुणा। अर्थकार्श्यं दारिद्र्यमचिन्तयित्वाऽविचार्य। अहं वित्तस्य धनस्य चतस्रो दश च कोटीश्चतुर्दशकोटीर्मे मह्यमाहरानयेति विद्यापरिसंख्यया विद्यपरिसंख्यानुसारेणैवोक्तः। अत्र मनुः-
अङ्गानि वेदाश्चत्वारो मीमांसा न्यायविस्तरः। पुराणं धर्मशास्त्रं च विद्या ह्येताश्चतुर्दश॥ इति ॥
Summary
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"Angered by my insistence, the guru, without considering my poverty, told me: 'Bring me fourteen crores of gold coins, corresponding to the fourteen branches of knowledge you have learned from me.'"
सारांश
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कौत्स ने बताया कि गुरु ने उनकी हठ से रुष्ट होकर और उनकी निर्धनता का विचार न करते हुए, उनसे चौदह विद्याओं के बदले चौदह करोड़ स्वर्ण मुद्राएँ माँगी हैं।
पदच्छेदः
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| निर्बन्धसंजातरुषा | निर्बन्ध–संजात–रुष् (३.१) | by the one in whom anger was born from insistence |
| अर्थकार्श्यम् | अर्थ–कार्श्य (२.१) | poverty |
| अचिन्तयित्वा | अचिन्तयित्वा (अ√चिन्त्+क्त्वा) | without considering |
| गुरुणा | गुरु (३.१) | by the guru |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| उक्तः | उक्त (√वच्+क्त, १.१) | was told |
| वित्तस्य | वित्त (६.१) | of wealth |
| विद्यापरिसंख्यया | विद्या–परिसंख्या (३.१) | by the number of sciences |
| मे | अस्मद् (४.१) | for me |
| कोटीः | कोटि (२.३) | crores |
| चतस्रः | चतुर् (२.३) | four |
| दश | दशन् (२.३) | and ten |
| च | च | and |
| आहर | आहर (आ√हृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | bring |
| इति | इति | thus |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | र्ब | न्ध | सं | जा | त | रु | षा | र्थ | का | र्श्य |
| म | चि | न्त | यि | त्वा | गु | रु | णा | ह | मु | क्तः |
| वि | त्त | स्य | वि | द्या | प | रि | सं | ख्य | या | मे |
| को | टी | श्च | त | स्रो | द | श | चा | ह | रे | ति |
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