सोऽहं सपर्याविधिभाजनेन
मत्वा भवन्तं प्रभुशब्दशेषम् ।
अभ्युत्सहे संप्रति नोपरोद्धु-
मल्पेतरत्वाच्छ्रुतनिष्क्रयस्य ॥
सोऽहं सपर्याविधिभाजनेन
मत्वा भवन्तं प्रभुशब्दशेषम् ।
अभ्युत्सहे संप्रति नोपरोद्धु-
मल्पेतरत्वाच्छ्रुतनिष्क्रयस्य ॥
मत्वा भवन्तं प्रभुशब्दशेषम् ।
अभ्युत्सहे संप्रति नोपरोद्धु-
मल्पेतरत्वाच्छ्रुतनिष्क्रयस्य ॥
अन्वयः
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सः अहम्, भवन्तं सपर्या-विधि-भाजनं प्रभु-शब्द-शेषं च मत्वा, श्रुत-निष्क्रयस्य अल्प-इतरत्वात् संप्रति त्वाम् उपरोद्धुं न अभ्युत्सहे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
सोऽहमितिः॥ सोऽहं सपर्याविधिभाजनेनार्घ्यपात्रेण भवन्तं
प्रभु-शब्द एव शेषो यस्य तं मत्वा। निःस्वं निश्चित्येत्यर्थः। श्रुतनिष्क्रयस्य विद्यामूल्यस्याल्पेतरत्वादतिमहत्त्वात् संप्रत्युपरोद्धुं निर्बन्धुं नाभ्युत्सहे ॥
Summary
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"Therefore I, considering you a worthy recipient of service but now left with only the title of 'lord', do not dare to press you now, because the price for my learning is not small."
सारांश
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कौत्स बोले कि यज्ञ के बाद अब आपके पास केवल राजा का नाम शेष है, अतः आपकी इस स्थिति को जानते हुए मैं गुरु-दक्षिणा की इतनी बड़ी राशि के लिए आपको बाधित नहीं करना चाहता।
पदच्छेदः
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| सः | तद् (१.१) | That |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| सपर्याविधिभाजनेन | सपर्या–विधि–भाजन (३.१) | by being a vessel for the rules of worship |
| मत्वा | मत्वा (√मन्+क्त्वा) | having considered |
| भवन्तम् | भवत् (२.१) | you |
| प्रभुशब्दशेषम् | प्रभु–शब्द–शेष (२.१) | to be one with only the title 'lord' remaining |
| अभ्युत्सहे | अभ्युत्सहे (अभि+उत्√सह् कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I dare |
| संप्रति | संप्रति | now |
| न | न | not |
| उपरोद्धुम् | उपरोद्धुम् (उप√रुध्+तुमुन्) | to press |
| अल्पेतरत्वात् | अल्प–इतरत्व (५.१) | due to the not-smallness |
| श्रुतनिष्क्रयस्य | श्रुत–निष्क्रय (६.१) | of the price for my learning |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सो | ऽहं | स | प | र्या | वि | धि | भा | ज | ने | न |
| म | त्वा | भ | व | न्तं | प्र | भु | श | ब्द | शे | षम् |
| अ | भ्यु | त्स | हे | सं | प्र | ति | नो | प | रो | द्धु |
| म | ल्पे | त | र | त्वा | च्छ्रु | त | नि | ष्क्र | य | स्य |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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