गुर्वर्थमर्थी श्रुतपारदृश्वा
रघोः सकाशादनवाप्य कामम् ।
गतो वदान्यान्तरमित्ययं मे
मा भूत्परीवादनवावतारः ॥
गुर्वर्थमर्थी श्रुतपारदृश्वा
रघोः सकाशादनवाप्य कामम् ।
गतो वदान्यान्तरमित्ययं मे
मा भूत्परीवादनवावतारः ॥
रघोः सकाशादनवाप्य कामम् ।
गतो वदान्यान्तरमित्ययं मे
मा भूत्परीवादनवावतारः ॥
अन्वयः
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श्रुत-पार-दृश्वा अर्थी गुरु-अर्थं रघोः सकाशात् कामम् अनवाप्य वदान्य-अन्तरं गतः, इति अयं मे नव-परीवाद-अवतारः मा भूत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
गुर्वर्थमिति॥ श्रुतस्य पारं दृष्टवाञ्च्छ्रुतपारदृश्वा।
दृशेः क्वनिप् (पा३।२।९४) इति क्वनिप्। गुर्वर्थं गुरुदक्षिणार्थं यथा तथाऽर्थी याचकः। विशेषणद्वयेनाप्यस्याप्रत्याख्येयत्वमाह। रघोः सकाशात् कामं मनोरथमनवाप्याप्राप्य वदान्यान्तरं तात्रन्तरं गतः। स्युर्वदान्यस्थूललक्ष्यदानशौण्डा बहुप्रदे इत्यमरः (अमरकोशः ३.१.६ ) । इत्येवंरेूपोऽयं परीवादस्यापवादस्य नवो नूतनः प्रथमोऽवतार आविर्भावो मे मा भून्माऽस्तु। रघोः इति स्वनामग्रहणं संभावितत्वद्योतनार्थम्। तथा च(भ.गी.२।३४)-संभावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते इति भावः ॥
Summary
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"Let not this new slander arise for me: that a supplicant who has mastered the scriptures, seeking wealth for his guru, went to another benefactor after failing to obtain his desire from Raghu."
सारांश
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रघु ने कहा कि यह कलंक न फैले कि गुरु-दक्षिणा का इच्छुक कोई विद्वान रघु के पास से अपनी मनोकामना पूरी किए बिना किसी अन्य दानी के पास गया।
पदच्छेदः
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| गुर्वर्थम् | गुरु–अर्थ (२.१) | wealth for the guru |
| अर्थी | अर्थिन् (१.१) | a supplicant |
| श्रुतपारदृश्वा | श्रुत–पार–दृश्वन् (१.१) | who has seen the other shore of the scriptures |
| रघोः | रघु (५.१) | from Raghu |
| सकाशात् | सकाशात् | from |
| अनवाप्य | अनवाप्य (न+अव√आप्+ल्यप्) | not having obtained |
| कामम् | काम (२.१) | his desire |
| गतः | गत (√गम्+क्त, १.१) | went |
| वदान्यान्तरम् | वदान्य–अन्तर (२.१) | to another benefactor |
| इति | इति | thus |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| मे | अस्मद् (६.१) | for me |
| मा | मा | let not |
| भूत् | भूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | be |
| परीवादनवावतारः | परीवाद–नव–अवतार (१.१) | a new instance of slander |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| गु | र्व | र्थ | म | र्थी | श्रु | त | पा | र | दृ | श्वा |
| र | घोः | स | का | शा | द | न | वा | प्य | का | मम् |
| ग | तो | व | दा | न्या | न्त | र | मि | त्य | यं | मे |
| मा | भू | त्प | री | वा | द | न | वा | व | ता | रः |
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