अथोष्ट्रवामीशतवाहितार्थे
प्रजेश्वरं प्रीतमना महर्षिः ।
स्पृशन्करेणानतपूर्वकायं
संप्रस्थितो वाचमुवाच कौत्सः ॥
अथोष्ट्रवामीशतवाहितार्थे
प्रजेश्वरं प्रीतमना महर्षिः ।
स्पृशन्करेणानतपूर्वकायं
संप्रस्थितो वाचमुवाच कौत्सः ॥
प्रजेश्वरं प्रीतमना महर्षिः ।
स्पृशन्करेणानतपूर्वकायं
संप्रस्थितो वाचमुवाच कौत्सः ॥
अन्वयः
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अथ उष्ट्र-वामी-शत-वाहित-अर्थे (सति), प्रीतमनाः महर्षिः कौत्सः, संप्रस्थितः सन्, आनत-पूर्व-कायं प्रजेश्वरं करेण स्पृशन्, वाचम् उवाच।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अथेति॥ अथ प्रीतमना महर्षिः कौत्सः संप्रस्थितः प्रस्थास्यमानः सन्।
आशंसायां भूतवञ्च (अष्टाध्यायी ३.३.१३२ ) इति भविष्यदर्थे क्तः। उष्ट्राणां क्रमेलकानां वामीनां वडवानां च शतैर्वाहितार्थं प्रापितधनमानतपूर्वकायम्। विनयनम्रमित्यर्थः। प्रजेश्वरं रघुं करेण स्पृशन्, वाचमुवाच ॥
Summary
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Then, as the wealth was being carried away by hundreds of camels and mares, the great sage Kautsa, pleased in his heart and ready to depart, touched the lord of the people (Raghu), who had bent his upper body in reverence, and spoke these words.
सारांश
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ऊँटों और घोड़ों पर स्वर्ण लादकर विदा होते समय प्रसन्न महर्षि कौत्स ने राजा रघु के कंधे का स्पर्श करते हुए उनसे कुछ वचन कहे।
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | Then |
| उष्ट्रवामीशतवाहितार्थे | उष्ट्र–वामी–शत–वाहित–अर्थ (७.१) | when the wealth was being carried by hundreds of camels and mares |
| प्रजेश्वरम् | प्रजा–ईश्वर (२.१) | the lord of the people |
| प्रीतमनाः | प्रीत–मनस् (१.१) | pleased in his heart |
| महर्षिः | महर्षि (१.१) | the great sage |
| स्पृशन् | स्पृशत् (√स्पृश्+शतृ, १.१) | touching |
| करेण | कर (३.१) | with his hand |
| आनतपूर्वकायम् | आनत–पूर्व–काय (२.१) | him whose upper body was bent |
| संप्रस्थितः | संप्रस्थित (सम्+प्र√स्था+क्त, १.१) | ready to depart |
| वाचम् | वाच् (२.१) | words |
| उवाच | उवाच (√वच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | spoke |
| कौत्सः | कौत्स (१.१) | Kautsa |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थो | ष्ट्र | वा | मी | श | त | वा | हि | ता | र्थे |
| प्र | जे | श्व | रं | प्री | त | म | ना | म | ह | र्षिः |
| स्पृ | श | न्क | रे | णा | न | त | पू | र्व | का | यं |
| सं | प्र | स्थि | तो | वा | च | मु | वा | च | कौ | त्सः |
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