अप्यग्रणीर्मन्त्रकृतामृषीणां
कुशाग्रबुद्धे कुशली गुरुस्ते ।
यतस्त्वया ज्ञानमशेषमाप्तं
लोकेन चैतन्यमिवोष्णरश्मेः ॥
अप्यग्रणीर्मन्त्रकृतामृषीणां
कुशाग्रबुद्धे कुशली गुरुस्ते ।
यतस्त्वया ज्ञानमशेषमाप्तं
लोकेन चैतन्यमिवोष्णरश्मेः ॥
कुशाग्रबुद्धे कुशली गुरुस्ते ।
यतस्त्वया ज्ञानमशेषमाप्तं
लोकेन चैतन्यमिवोष्णरश्मेः ॥
अन्वयः
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कुशाग्रबुद्धे! मन्त्रकृताम् ऋषीणाम् अग्रणीः ते गुरुः अपि कुशली? यतः त्वया अशेषम् ज्ञानम् आप्तम्, उष्णरश्मेः लोकेन चैतन्यम् इव।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अप्यग्रणीरिति॥ हे कुशाग्रबुद्धे सूक्ष्मबुद्धे!
कुशाग्रीयमतिः प्रोक्तः सूक्ष्मदर्शी च यः पुमान् इति हलायुधः। मन्त्रकृतां मन्त्रस्रष्टॄणाम्। सुकर्मपापमन्त्र- (अष्टाध्यायी ३.२.८९ ) इत्यादिना क्विप्। ऋषीणामग्रणीः श्रेष्ठस्ते तव गुरुः कुशल्यपि क्षेमवान्किम्? अपिप्रश्ने। गर्हासमुञ्चयप्रश्नशङ्कासंभावनास्वपि इत्यमरः। यतो यस्माद्गुरोः सकाशात् त्वयाऽशेषं ज्ञानम्। लोकेनोष्णरश्मेः सूर्याञ्चैतन्यं प्रबोध इव। आप्तं स्वीकृतम् ॥
Summary
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"O you of intellect as sharp as the tip of Kusha grass! Is your teacher, the foremost among the sages who compose mantras, well? It is from him that you have obtained complete knowledge, just as the world receives consciousness from the sun."
सारांश
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रघु ने पूछा कि क्या मन्त्रदृष्टा ऋषियों में श्रेष्ठ आपके गुरु कुशल हैं? जिनसे आपने वैसे ही पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया है जैसे संसार सूर्य से प्रकाश पाता है।
पदच्छेदः
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| अपि | अपि | (question particle) |
| अग्रणीः | अग्रणी (१.१) | the foremost |
| मन्त्रकृताम् | मन्त्र–कृत् (६.३) | of the composers of mantras |
| ऋषीणाम् | ऋषि (६.३) | of the sages |
| कुशाग्रबुद्धे | कुश–अग्र–बुद्धि (८.१) | O one with an intellect sharp as a blade of grass |
| कुशली | कुशलिन् (१.१) | well |
| गुरुः | गुरु (१.१) | teacher |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| यतः | यतः | from whom |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| ज्ञानम् | ज्ञान (२.१) | knowledge |
| अशेषम् | अशेष (२.१) | complete |
| आप्तम् | आप्त (√आप्+क्त, १.१) | has been obtained |
| लोकेन | लोक (३.१) | by the world |
| चैतन्यम् | चैतन्य (१.१) | consciousness |
| इव | इव | like |
| उष्णरश्मेः | उष्ण–रश्मि (६.१) | from the sun |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | प्य | ग्र | णी | र्म | न्त्र | कृ | ता | मृ | षी | णां |
| कु | शा | ग्र | बु | द्धे | कु | श | ली | गु | रु | स्ते |
| य | त | स्त्व | या | ज्ञा | न | म | शे | ष | मा | प्तं |
| लो | के | न | चै | त | न्य | मि | वो | ष्ण | र | श्मेः |
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