कायेन वाचा मनसापि शश्व-
द्यत्संभृतं वासवधैर्यलोपि ।
आपाद्यते न व्ययमन्तरायैः
कञ्चिन्महर्षेस्त्त्रिविधं तपस्तत् ॥
कायेन वाचा मनसापि शश्व-
द्यत्संभृतं वासवधैर्यलोपि ।
आपाद्यते न व्ययमन्तरायैः
कञ्चिन्महर्षेस्त्त्रिविधं तपस्तत् ॥
द्यत्संभृतं वासवधैर्यलोपि ।
आपाद्यते न व्ययमन्तरायैः
कञ्चिन्महर्षेस्त्त्रिविधं तपस्तत् ॥
अन्वयः
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महर्षेः कायेन वाचा मनसा अपि शश्वत् यत् वासवधैर्यलोपि त्रिविधम् तपः संभृतम्, तत् अन्तरायैः व्ययम् न आपाद्यते कञ्चित्?
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
कायेनेति॥ कायेनोपवासादिकृच्छ्रचान्द्रायणादिना वाचा वेदपाठेन मनसा गायत्रीजपादिना कायेन वाचा मनसापि करणेन वासवस्येन्द्रस्य धैर्यं लुम्पतीति वासवधैर्यलोपि। स्वपदापहारशङ्काजनकमित्यर्थः। यत्तपः शश्वदसकृत्।
मुहुः पुनः पुनः शश्वदभीक्ष्णससकृत्समाः इत्यमरः। संभृतं संचितं महर्षेर्वरतन्तोस्त्त्रिविधं वाङ्मनः कायजं तत्तपोऽन्तरायैर्विघ्नैरिन्द्रप्रेरिताप्सरः शापैर्व्ययं नाशं नापाद्यते कञ्चित् न नीयते किम्? कञ्चित् कामप्रवेदने इत्यमरः॥
Summary
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"I hope that the great sage's three-fold penance—constantly accumulated through body, speech, and mind, and potent enough to shatter even Indra's fortitude—is not being wasted by any obstacles?"
सारांश
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क्या महर्षि का मन, वचन और शरीर से किया जाने वाला वह त्रिविध तप निर्विघ्न चल रहा है, जो इन्द्र के धैर्य को भी विचलित कर देने वाला है?
पदच्छेदः
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| कायेन | काय (३.१) | by body |
| वाचा | वाच् (३.१) | by speech |
| मनसा | मनस् (३.१) | by mind |
| अपि | अपि | also |
| शश्वत् | शश्वत् | constantly |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| संभृतम् | संभृत (सम्√भृ+क्त, १.१) | is accumulated |
| वासवधैर्यलोपि | वासव–धैर्य–लोपिन् (१.१) | that which destroys Indra's fortitude |
| आपाद्यते | आपाद्यते (आ√पद् +णिच् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is brought to |
| न | न | not |
| व्ययम् | व्यय (२.१) | destruction |
| अन्तरायैः | अन्तराय (३.३) | by obstacles |
| कञ्चित् | कञ्चित् | I hope |
| महर्षेः | महर्षि (६.१) | of the great sage |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| त्रिविधम् | त्रिविध (१.१) | three-fold |
| तपः | तपस् (१.१) | austerity |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| का | ये | न | वा | चा | म | न | सा | पि | श | श्व |
| द्य | त्सं | भृ | तं | वा | स | व | धै | र्य | लो | पि |
| आ | पा | द्य | ते | न | व्य | य | म | न्त | रा | यैः |
| क | ञ्चि | न्म | ह | र्षे | स्त्त्रि | वि | धं | त | प | स्तत् |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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