स विद्धमात्रः किल नागरूप-
मुत्सृज्य तद्विस्मितसैन्यदृष्टः ।
स्फुरत्प्रभामण्डलमध्यवर्ति
कान्तं वपुर्व्योमचरं प्रपेदे ॥
स विद्धमात्रः किल नागरूप-
मुत्सृज्य तद्विस्मितसैन्यदृष्टः ।
स्फुरत्प्रभामण्डलमध्यवर्ति
कान्तं वपुर्व्योमचरं प्रपेदे ॥
मुत्सृज्य तद्विस्मितसैन्यदृष्टः ।
स्फुरत्प्रभामण्डलमध्यवर्ति
कान्तं वपुर्व्योमचरं प्रपेदे ॥
अन्वयः
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किल सः विद्ध-मात्रः (सन्) तत्-विस्मित-सैन्य-दृष्टः नाग-रूपम् उत्सृज्य, स्फुरत्-प्रभा-मण्डल-मध्य-वर्ति कान्तम् व्योम-चरम् वपुः प्रपेदे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
स इति॥ स गजो विद्धमात्रस्तडितमात्रः किल न तु प्रहृतस्तथापि नागरूपं गजशरीरमुत्सृज्य तेन वृत्तान्तेन विस्मितैस्तद्विस्मितैः सैन्यैर्दृष्टः सन् । स्फुरतः प्रभामण्डलस्य मध्यवर्ति कान्तं मनोहरं व्योमचरं वपुः प्रपेदे प्राप ॥
Summary
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Indeed, as soon as he was struck, he abandoned the form of an elephant. Watched by the astonished army, he attained the beautiful body of a celestial being, situated within a radiant halo of light.
सारांश
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बाण लगते ही उस हाथी ने अपना शरीर त्याग दिया और आश्चर्यचकित सेना के सामने ही वह एक दिव्य प्रकाशमान गंधर्व के रूप में आकाश में स्थित हो गया।
पदच्छेदः
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| सः | तद् (१.१) | he |
| विद्धमात्रः | विद्ध–मात्र (१.१) | as soon as he was struck |
| किल | किल | indeed |
| नागरूपम् | नाग–रूप (२.१) | the form of an elephant |
| उत्सृज्य | उत्सृज्य (उद्√सृज्+ल्यप्) | having abandoned |
| तद्विस्मितसैन्यदृष्टः | तत्–विस्मित–सैन्य–दृष्ट (१.१) | watched by the astonished army |
| स्फुरत्प्रभामण्डलमध्यवर्ति | स्फुरत्–प्रभामण्डल–मध्य–वर्तिन् (२.१) | situated in the middle of a radiant halo |
| कान्तम् | कान्त (२.१) | beautiful |
| वपुः | वपुस् (२.१) | body |
| व्योमचरम् | व्योम–चर (२.१) | of a celestial being |
| प्रपेदे | प्रपेदे (प्र√पद् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | attained |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | वि | द्ध | मा | त्रः | कि | ल | ना | ग | रू | प |
| मु | त्सृ | ज्य | त | द्वि | स्मि | त | सै | न्य | दृ | ष्टः |
| स्फु | र | त्प्र | भा | म | ण्ड | ल | म | ध्य | व | र्ति |
| का | न्तं | व | पु | र्व्यो | म | च | रं | प्र | पे | दे |
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