संमोचितः सत्त्ववता त्वयाहं
शापाञ्चिरप्रार्थितदर्शनेन ।
प्रतिप्रियं चेद्भवतो न कुर्यां
वृथा हि मे स्यात्स्वपदोपलब्धिः ॥
संमोचितः सत्त्ववता त्वयाहं
शापाञ्चिरप्रार्थितदर्शनेन ।
प्रतिप्रियं चेद्भवतो न कुर्यां
वृथा हि मे स्यात्स्वपदोपलब्धिः ॥
शापाञ्चिरप्रार्थितदर्शनेन ।
प्रतिप्रियं चेद्भवतो न कुर्यां
वृथा हि मे स्यात्स्वपदोपलब्धिः ॥
अन्वयः
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चिरप्रार्थितदर्शनेन सत्त्ववता त्वया अहं शापात् संमोचितः । चेत् भवतः प्रतिप्रियं न कुर्याम्, हि मे स्वपदोपलब्धिः वृथा स्यात् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
संमोचित इति॥ चिरं प्रार्थितं दर्शनं यस्य तेन सत्त्ववता बलवता त्वयाऽहं शापात्संमोचितो मोक्षं प्रापितः। भवतः प्रतिप्रियं प्रत्युपकारं न कुया चेन्मे स्वपदोपलब्धिः स्वस्थानप्राप्तिः।
पदं व्यवसितत्राणस्थानलक्ष्माङ्घिवस्तुषु इत्यमरः। वृथा स्याद्धि। तदुक्तम्-प्रतिकर्तुमशक्तस्य जीवितान्मरणं वरम् इति ॥
Summary
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I have been freed from the curse by you, a man of great strength, whose sight I have long desired. If I do not do a favor in return for you, my regaining of my own form would indeed be in vain.
सारांश
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हे वीर! आपने मुझे शापमुक्त किया है। यदि मैं आपकी सहायता न करूँ, तो मेरा यह गंधर्व पद प्राप्त करना निरर्थक ही माना जाएगा।
पदच्छेदः
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| संमोचितः | संमोचित (सम्√मुच्+णिच्+क्त, १.१) | I have been freed |
| सत्त्ववता | सत्त्ववत् (३.१) | by the strong one |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| शापात् | शाप (५.१) | from the curse |
| चिरप्रार्थितदर्शनेन | चिर–प्रार्थित–दर्शन (३.१) | whose sight was long desired |
| प्रतिप्रियम् | प्रतिप्रिय (२.१) | a return favor |
| चेत् | चेत् | if |
| भवतः | भवत् (६.१) | to you |
| न | न | not |
| कुर्याम् | कुर्याम् (√कृ कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I should do |
| वृथा | वृथा | in vain |
| हि | हि | indeed |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would be |
| स्वपदोपलब्धिः | स्व–पद–उपलब्धि (१.१) | attainment of my own state |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | मो | चि | तः | स | त्त्व | व | ता | त्व | या | हं |
| शा | पा | ञ्चि | र | प्रा | र्थि | त | द | र्श | ने | न |
| प्र | ति | प्रि | यं | चे | द्भ | व | तो | न | कु | र्यां |
| वृ | था | हि | मे | स्या | त्स्व | प | दो | प | ल | ब्धिः |
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