एवं तयोरध्वनि दैवयोगा-
दासेदुषोः सख्यमचिन्त्यहेतु ।
एको ययौ चैत्ररथप्रदेशान्
सौराज्यरम्यानपरो विदर्भान् ॥
एवं तयोरध्वनि दैवयोगा-
दासेदुषोः सख्यमचिन्त्यहेतु ।
एको ययौ चैत्ररथप्रदेशान्
सौराज्यरम्यानपरो विदर्भान् ॥
दासेदुषोः सख्यमचिन्त्यहेतु ।
एको ययौ चैत्ररथप्रदेशान्
सौराज्यरम्यानपरो विदर्भान् ॥
अन्वयः
AI
एवम् अध्वनि दैवयोगात् अचिन्त्यहेतु सख्यम् आसेदुषोः तयोः, एकः सौराज्य-रम्यान् चैत्ररथ-प्रदेशान् ययौ, अपरः विदर्भान् ययौ ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
एवमिति॥ एवमध्वनि मार्गे दैवयोगाद्दैववशादचिन्त्यहेत्वनिर्धार्यहेत्तुकं सख्यं सखित्वम्।
सख्युर्यः (अष्टाध्यायी ५.१.१२६ ) इति यप्रत्ययः। आसेदुषोः प्राप्तवतोस्तयोर्मध्य एको गन्धर्वश्चैत्ररथस्य कुबेरोद्यानस्य प्रदेशान्। अस्योद्यानं चैत्ररथम् इत्यमरः (अमरकोशः १.१.८५ ) । अपरोऽजः सौराज्येन राजन्वत्तया रम्यान्विदर्भान्विदर्भदेशान् ययौ ॥
Summary
AI
Thus, on the path, by a stroke of fate, an unforeseeable friendship was formed between the two. One (the Gandharva) went to the regions of Chaitraratha, made beautiful by good rule, while the other (Aja) went to Vidarbha.
सारांश
AI
इस प्रकार दैवयोग से उन दोनों में अचानक मित्रता हो गई। गंधर्व कुबेर के प्रदेश की ओर चले गए और अज विदर्भ देश की ओर प्रस्थान कर गए।
पदच्छेदः
AI
| एवम् | एवम् | Thus |
| तयोः | तद् (६.२) | between the two of them |
| अध्वनि | अध्वन् (७.१) | on the path |
| दैवयोगात् | दैवयोग (५.१) | by a stroke of fate |
| आसेदुषोः | आसेदिवस् (आ√सद्+क्वसु, ६.२) | who had attained |
| सख्यम् | सख्य (२.१) | friendship |
| अचिन्त्यहेतु | अचिन्त्यहेतु (२.१) | of unforeseeable cause |
| एकः | एक (१.१) | one |
| ययौ | ययौ (√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | went |
| चैत्ररथप्रदेशान् | चैत्ररथ–प्रदेश (२.३) | to the regions of Chaitraratha |
| सौराज्यरम्यान | सौराज्य–रम्य (२.३) | made beautiful by good rule |
| अपरः | अपर (१.१) | the other |
| विदर्भान् | विदर्भ (२.३) | to Vidarbha |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | वं | त | यो | र | ध्व | नि | दै | व | यो | गा |
| दा | से | दु | षोः | स | ख्य | म | चि | न्त्य | हे | तु |
| ए | को | य | यौ | चै | त्र | र | थ | प्र | दे | शा |
| न्सौ | रा | ज्य | र | म्या | न | प | रो | वि | द | र्भान् |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.