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ताम्रोदरेषु पतितं तरुपल्लवेषु
निर्धौतहारगुलिकाविशदं हिमाम्भः ।
आभाति लब्धपरभागतयाधरोष्ठे
लीलास्मितं सदशनार्चिरिव त्वदीयम् ॥

अन्वयः AI तरु-पल्लवेषु ताम्र-उदरेषु पतितं, निर्धौत-हार-गुलिका-विशदं हिम-अम्भः, अधर-ओष्ठे लब्ध-परभाग-तया त्वदीयं स-दशन-अर्चिः लीला-स्मितम् इव आभाति ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) ताम्रेति॥ ताम्रोदरेष्वरुणाभ्यन्तरेषु तरुपल्लवेषु पतितं निर्धौता या हारगुलिका मुक्तामणयस्तद्वद्विशदं हिमाम्भो लब्धपरभागतया लब्धोत्कर्षतया। परभागो गुणोत्कर्षे इति यादवः। अधरोष्ठे त्वदीयं सदशनार्चिर्दन्तकान्तिसहितं लीलास्मितमिवाभाति शोभते ॥
Summary AI The dew, fallen on the coppery undersides of young tree leaves and as clear as washed pearls, shines like your playful smile on your lower lip, which, having attained superior beauty, reveals the gleam of your teeth.
सारांश AI वृक्षों के लाल कोमल पत्तों पर गिरी ओस की बूंदें मोतियों की तरह चमक रही हैं। वे आपके लाल अधरों पर दांतों की कांति वाली मंद मुस्कान की सुंदर शोभा के समान दिखाई दे रही हैं।
पदच्छेदः AI
ताम्रोदरेषुताम्रउदर (७.३) on the coppery undersides
पतितंपतित (√पत्+क्त, १.१) fallen
तरुपल्लवेषुतरुपल्लव (७.३) on the young tree leaves
निर्धौतहारगुलिकाविशदंनिर्धौतहारगुलिकाविशद (१.१) as clear as washed pearls from a necklace
हिमाम्भःहिमअम्भस् (१.१) dew
आभातिआभाति (आ√भा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) shines
लब्धपरभागतयालब्धपरभागता (३.१) by having attained superior beauty
अधरोष्ठेअधरओष्ठ (७.१) on the lower lip
लीलास्मितंलीलास्मित (१.१) playful smile
सदशनार्चिरिवदशनअर्चिस् (१.१)इव like the gleam of teeth
त्वदीयम्त्वदीय (१.१) your
छन्दः वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४
ता म्रो रे षु ति तं रु ल्ल वे षु
नि र्धौ हा गु लि का वि दं हि मा म्भः
भा ति ब्ध भा या रो ष्ठे
ली ला स्मि तं ना र्चि रि त्व दी यम्
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