इति विरचितवाग्भिर्बन्दिपुत्रैः कुमारः
सपदि विगतनिद्रस्तल्पमुज्झांचकार ।
मदपटुनिनदद्भिर्बोधितो राजहंसैः
सुरगज इव गाङ्गं सैकतं सुप्रतीकः ॥
इति विरचितवाग्भिर्बन्दिपुत्रैः कुमारः
सपदि विगतनिद्रस्तल्पमुज्झांचकार ।
मदपटुनिनदद्भिर्बोधितो राजहंसैः
सुरगज इव गाङ्गं सैकतं सुप्रतीकः ॥
सपदि विगतनिद्रस्तल्पमुज्झांचकार ।
मदपटुनिनदद्भिर्बोधितो राजहंसैः
सुरगज इव गाङ्गं सैकतं सुप्रतीकः ॥
अन्वयः
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इति विरचित-वाग्भिः बन्दि-पुत्रैः (बोधितः) कुमारः, मद-पटु-निनदद्भिः राज-हंसैः बोधितः सुप्रतीकः सुर-गजः इव, सपदि विगत-निद्रः (सन्) तल्पम् उज्झांचकार।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
इतीति॥ इतीत्थँ विरचितवाग्भिर्बन्दिपुत्रैर्वैतालिकैः।
पुत्रग्रहणं समानवयस्कत्वद्योतनार्थम्। सपदि विगतनिद्रः कुमारः। तल्पं शय्याम्। तल्पं शय्याट्टदारेषु इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.१३८ ) । उज्झांचकार विससर्ज। इजादेश्च गुरुमतोऽनृच्छः (अष्टाध्यायी ३.१.३६ ) इत्याम्प्रत्ययः। कथमिव? मदेन पटु मधुरं निनदद्भी राजहंसैर्बोधितः सुप्रतीकाख्यः सुरगज ईशानदिग्गजः। गङ्गाया इदं गाङ्गम्। सैकतं पुलिनमिव। तोयोत्थितं तत्पुलिनं सैकतं सिकतामयम् इत्यमरः (अमरकोशः १.१०.९ ) । सिकताशर्कराभ्यां च (अष्टाध्यायी ५.२.१०४ ) इत्यण्प्रत्ययः। सुप्रतीकग्रहणं प्रायशः कैलासवालिनस्तस्य नित्यं गङ्गातटविहारसंभवादित्यनुसंधेयम् ॥
Summary
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Thus addressed by the bards' sons with well-composed words, Prince Aja, his sleep dispelled, immediately left his bed. He was like Supratīka, the divine elephant, who, awakened by the loud, impassioned cries of royal swans, leaves a sandbank of the Ganges.
सारांश
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वंदीपुत्रों के इन स्तुति वचनों से राजकुमार अज तुरंत जाग गए और शय्या त्याग दी, जैसे राजहंसों के स्वर से जागकर दिग्गज सुप्रतीक गंगा के रेतीले तट को छोड़ देता है।
पदच्छेदः
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| इति | इति | thus |
| विरचितवाग्भिः | विरचित–वाच् (३.३) | by those with well-composed words |
| बन्दिपुत्रैः | बन्दि–पुत्र (३.३) | by the sons of bards |
| कुमारः | कुमार (१.१) | the prince |
| सपदि | सपदि | immediately |
| विगतनिद्रः | विगत–निद्र (१.१) | he whose sleep was gone |
| तल्पम् | तल्प (२.१) | the bed |
| उज्झांचकार | उज्झांचकार (√उज्झ् +आम्+कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | left |
| मदपटुनिनदद्भिः | मद–पटु–निनदत् (३.३) | by those crying out loudly in passion |
| बोधितः | बोधित (√बुध्+णिच्+क्त, १.१) | awakened |
| राजहंसैः | राज–हंस (३.३) | by the royal swans |
| सुरगजः | सुर–गज (१.१) | the divine elephant |
| इव | इव | like |
| गाङ्गम् | गाङ्ग (२.१) | of the Ganges |
| सैकतम् | सैकत (२.१) | a sandbank |
| सुप्रतीकः | सुप्रतीक (१.१) | Supratika |
छन्दः
मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | ति | वि | र | चि | त | वा | ग्भि | र्ब | न्दि | पु | त्रैः | कु | मा | रः |
| स | प | दि | वि | ग | त | नि | द्र | स्त | ल्प | मु | ज्झां | च | का | र |
| म | द | प | टु | नि | न | द | द्भि | र्बो | धि | तो | रा | ज | हं | सैः |
| सु | र | ग | ज | इ | व | गा | ङ्गं | सै | क | तं | सु | प्र | ती | कः |
| न | न | म | य | य | ||||||||||
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