मनुष्यवाह्यं चतुरस्रयान-
मध्यास्य कन्या परिवारशोभि ।
विवेश मञ्चान्तरराजमार्गं
पतिंवरा क्लृप्तविवाहवेषा ॥
मनुष्यवाह्यं चतुरस्रयान-
मध्यास्य कन्या परिवारशोभि ।
विवेश मञ्चान्तरराजमार्गं
पतिंवरा क्लृप्तविवाहवेषा ॥
मध्यास्य कन्या परिवारशोभि ।
विवेश मञ्चान्तरराजमार्गं
पतिंवरा क्लृप्तविवाहवेषा ॥
अन्वयः
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पतिंवरा क्लृप्त-विवाह-वेषा कन्या मनुष्य-वाह्यम् चतुरस्र-यानम् अध्यास्य, परिवार-शोभि (सती) मञ्च-अन्तर-राजमार्गम् विवेश।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
मनुष्येति॥ पतिं वृणोतीति पतिंवरा स्वयंवरा।
अथ स्वयंवरा। पतिंवरा च वर्याथ इत्यमरः। संज्ञायां भृतॄवृजि- (अष्टाध्यायी ३.२.४६ ) इत्यादिना खच्प्रत्ययः। क्लृप्तविवाहवेषा कन्येन्दुमती मनुष्यैर्वाह्यं परिवारेण परिजनेन शोभि चतुरस्रयानं चतुरस्रवाहनं शिबिकामध्यास्यारुह्य मञ्चान्तरे मञ्चमध्ये यो राजमार्गस्तं वेवेश ॥
Summary
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At that moment, the maiden (Indumati), choosing her husband, dressed in her wedding attire and radiant amidst her attendants, mounted a square, man-borne palanquin and entered the royal path between the stages.
सारांश
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विवाह के वेश में सजी हुई और पालकी पर सवार इन्दुमती ने सखियों के साथ मंचों के बीच बने राजपथ में प्रवेश किया।
पदच्छेदः
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| मनुष्यवाह्यम् | मनुष्य–वाह्य (२.१) | man-borne |
| चतुरस्रयानम् | चतुरस्र–यान (२.१) | a square palanquin |
| अध्यास्य | अध्यास्य (अधि√आस्+ल्यप्) | having mounted |
| कन्या | कन्या (१.१) | the maiden |
| परिवारशोभि | परिवार–शोभिन् (१.१) | shining amidst her attendants |
| विवेश | विवेश (वि√विश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | entered |
| मञ्चान्तरराजमार्गम् | मञ्च–अन्तर–राजमार्ग (२.१) | the royal path between the stages |
| पतिंवरा | पतिंवरा (१.१) | she who chooses her husband |
| क्लृप्तविवाहवेषा | क्लृप्त–विवाह–वेष (१.१) | she whose wedding attire was arranged |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | नु | ष्य | वा | ह्यं | च | तु | र | स्र | या | न |
| म | ध्या | स्य | क | न्या | प | रि | वा | र | शो | भि |
| वि | वे | श | म | ञ्चा | न्त | र | रा | ज | मा | र्गं |
| प | तिं | व | रा | क्लृ | प्त | वि | वा | ह | वे | षा |
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