तस्मिन्विधानातिशये विधातुः
कन्यामये नेत्रशतैकलक्ष्ये ।
निपेतुरन्तः करणैर्नरेन्द्रा
देहैः स्थिताः केवलमासनेषु ॥
तस्मिन्विधानातिशये विधातुः
कन्यामये नेत्रशतैकलक्ष्ये ।
निपेतुरन्तः करणैर्नरेन्द्रा
देहैः स्थिताः केवलमासनेषु ॥
कन्यामये नेत्रशतैकलक्ष्ये ।
निपेतुरन्तः करणैर्नरेन्द्रा
देहैः स्थिताः केवलमासनेषु ॥
अन्वयः
AI
विधातुः कन्या-मये, नेत्र-शत-एक-लक्ष्ये तस्मिन् विधान-अतिशये, नरेन्द्राः केवलम् देहैः आसनेषु स्थिताः (सन्तः), अन्तः-करणैः निपेतुः।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तस्मिन्निति॥ नेत्रशतानामेकलक्ष्य एकदृश्ये कन्यामये कन्यारूपे तस्मिन्विधातुर्विधानातिशये सृष्टिविशेषे नरेन्द्रा अन्तःकरणैर्निपेतुः। आसनेषु देहैः केवलं देहैरेव स्थिताः। देहानपि विस्मृत्य तत्रैव दत्तचित्ता बभूवुरित्यर्थः। अन्तःकरणकर्तृके निपतने नरेन्द्राणां कर्तृत्वव्यपदेश आदरातिशयार्थः ॥
Summary
AI
Upon that masterpiece of the Creator's art, embodied in the maiden and the sole target of hundreds of eyes, the kings fell with their minds. Only their bodies remained seated on their thrones.
सारांश
AI
विधाता की श्रेष्ठ रचना उस कन्या पर राजाओं के मन इस प्रकार एकाग्र हो गए कि उनके शरीर मात्र आसनों पर रह गए और हृदय उसके पीछे चल दिए।
पदच्छेदः
AI
| तस्मिन् | तद् (७.१) | upon that |
| विधानातिशये | विधान–अतिशय (७.१) | masterpiece |
| विधातुः | विधातृ (६.१) | of the Creator |
| कन्यामये | कन्या–मय (७.१) | embodied in the maiden |
| नेत्रशतैकलक्ष्ये | नेत्र–शत–एक–लक्ष्य (७.१) | the sole target of hundreds of eyes |
| निपेतुः | निपेतुः (नि√पत् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | fell |
| अन्तःकरणैः | अन्तः–करण (३.३) | with their minds |
| नरेन्द्राः | नरेन्द्र (१.३) | the kings |
| देहैः | देह (३.३) | with their bodies |
| स्थिताः | स्थित (√स्था+क्त, १.३) | remained |
| केवलम् | केवलम् | only |
| आसनेषु | आसन (७.३) | on their thrones |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मि | न्वि | धा | ना | ति | श | ये | वि | धा | तुः |
| क | न्या | म | ये | ने | त्र | श | तै | क | ल | क्ष्ये |
| नि | पे | तु | र | न्तः | क | र | णै | र्न | रे | न्द्रा |
| दे | हैः | स्थि | ताः | के | व | ल | मा | स | ने | षु |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.