विलालिनीविभ्रमदन्तपत्र-
मापाण्डुरं केतकबर्हमन्यः ।
प्रियानितम्बोचितसंनिवेशै-
र्विपाटयामास युवा नखाग्रैः ॥
विलालिनीविभ्रमदन्तपत्र-
मापाण्डुरं केतकबर्हमन्यः ।
प्रियानितम्बोचितसंनिवेशै-
र्विपाटयामास युवा नखाग्रैः ॥
मापाण्डुरं केतकबर्हमन्यः ।
प्रियानितम्बोचितसंनिवेशै-
र्विपाटयामास युवा नखाग्रैः ॥
अन्वयः
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अन्यः युवा प्रियानितम्बोचितसंनिवेशैः नखाग्रैः विलालिनीविभ्रमदन्तपत्रम् आपाण्डुरं केतकबर्हं विपाटयामास ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
विलासिनीति॥ अन्यो युवा विलासिन्याः प्रियाया विभ्रमार्थं दन्तपत्रं दन्तपत्रभूतमापाण्डुरं केतकबर्हं केतकदलम्।
दलेऽपि बर्हम् इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.२५१ ) । प्रियानितम्ब उचितसंनिवेशैरभ्यस्तनिक्षघेपणैर्नखाग्रैर्विपाटयामास। अहं तव नितम्ब एवं नखव्रणादीन्दास्यामि- इति नृपाशयः। तृणच्छेदकवत् पत्रपाटकोऽयमपलक्षणकः-इतीन्दुमत्याशयः ॥
Summary
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Another young king, with his fingertips—whose placement was suited for his beloved's hips—tore apart a pale white Ketaka flower petal, which served as an ear-ornament for a playful woman.
सारांश
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एक युवक राजा ने अपने नखों से केतकी के पीले पत्ते को विदीर्ण किया, जो उसकी कामुक चेष्टाओं को प्रदर्शित कर रहा था।
पदच्छेदः
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| विलालिनीविभ्रमदन्तपत्रम् | विलालिनी–विभ्रम–दन्तपत्र (२.१) | an ear-ornament for a playful woman's amorous gestures |
| आपाण्डुरम् | आपाण्डुर (२.१) | pale white |
| केतकबर्हम् | केतकबर्ह (२.१) | a Ketaka flower petal |
| अन्यः | अन्य (१.१) | another |
| प्रियानितम्बोचितसंनिवेशैः | प्रिया–नितम्ब–उचित–संनिवेश (३.३) | with placements suitable for a beloved's hips |
| विपाटयामास | विपाटयामास (वि√पट् +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | tore apart |
| युवा | युवन् (१.१) | a youth |
| नखाग्रैः | नख–अग्र (३.३) | with the tips of the nails |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | ला | लि | नी | वि | भ्र | म | द | न्त | प | त्र |
| मा | पा | ण्डु | रं | के | त | क | ब | र्ह | म | न्यः |
| प्रि | या | नि | त | म्बो | चि | त | सं | नि | वे | शै |
| र्वि | पा | ट | या | मा | स | यु | वा | न | खा | ग्रैः |
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