कामं नृपाः सन्तु सहस्रशोऽन्ये
राजन्वतीमाहुरनेन भूमिम् ।
नक्षत्रताराग्रहसंकुलापि
ज्योतिष्मती चन्द्रमसैव रात्रिः ॥
कामं नृपाः सन्तु सहस्रशोऽन्ये
राजन्वतीमाहुरनेन भूमिम् ।
नक्षत्रताराग्रहसंकुलापि
ज्योतिष्मती चन्द्रमसैव रात्रिः ॥
राजन्वतीमाहुरनेन भूमिम् ।
नक्षत्रताराग्रहसंकुलापि
ज्योतिष्मती चन्द्रमसैव रात्रिः ॥
अन्वयः
AI
कामम् अन्ये नृपाः सहस्रशः सन्तु । अनेन भूमिं राजन्वतीम् आहुः । नक्षत्रताराग्रहसंकुला अपि रात्रिः चन्द्रमसा एव ज्योतिष्मती भवति ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
काममिति॥ अन्ये नृपाः कामं सहस्रशः सन्तु। भूमिमनेन राजन्वतीं शोभनराजवतीमाहुः। नैतादृक्कश्चिदस्तीत्यर्थः।
सुराज्ञि देशे राजन्वान्स्यात्ततोऽन्यत्र राजवान् इत्यमरः (अमरकोशः २.१.१४ ) । राजन्वान्सौराज्ये (अष्टाध्यायी ८.२.१४ ) इति निपातनात्साधुः। तथा हि - नक्षत्रैरश्विन्यादिभिस्ताराभिः साधारणैर्ज्योतिर्भिर्ग्रहैर्भौमादिभिश्च संकुलाऽपि रात्रिश्चन्द्रमसैव ज्योतिरस्या अस्तीति ज्योतिष्मती। नान्येन ज्योतिषेत्यर्थः ॥
Summary
AI
"Let there be thousands of other kings; it is because of him that the earth is said to have a true ruler. Just as the night, though crowded with constellations, stars, and planets, is considered luminous only because of the moon."
सारांश
AI
यद्यपि पृथ्वी पर हजारों अन्य राजा हैं, परंतु यह भूमि इन्हीं के कारण 'सनाथ' कहलाती है। जैसे नक्षत्रों और तारों से भरा होने पर भी रात्रि केवल चंद्रमा से ही प्रकाशमान होती है।
पदच्छेदः
AI
| कामम् | कामम् | let it be |
| नृपाः | नृप (१.३) | kings |
| सन्तु | सन्तु (√अस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them be |
| सहस्रशः | सहस्रशस् | by thousands |
| अन्ये | अन्य (१.३) | other |
| राजन्वतीम् | राजन्वत् (२.१) | possessing a true king |
| आहुः | आहुः (√अह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they say |
| अनेन | इदम् (३.१) | by him |
| भूमिम् | भूमि (२.१) | the earth |
| नक्षत्रताराग्रहसंकुला | नक्षत्र–तारा–ग्रह–संकुल (१.१) | crowded with constellations, stars, and planets |
| अपि | अपि | even though |
| ज्योतिष्मती | ज्योतिष्मत् (१.१) | luminous |
| चन्द्रमसा | चन्द्रमस् (३.१) | by the moon |
| एव | एव | only |
| रात्रिः | रात्रि (१.१) | the night |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| का | मं | नृ | पाः | स | न्तु | स | ह | स्र | शो | ऽन्ये |
| रा | ज | न्व | ती | मा | हु | र | ने | न | भू | मिम् |
| न | क्ष | त्र | ता | रा | ग्र | ह | सं | कु | ला | पि |
| ज्यो | ति | ष्म | ती | च | न्द्र | म | सै | व | रा | त्रिः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.