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तां सैव वेत्रग्रहणे नियुक्ता
राजान्तरं राजसुतां निनाय ।
समीरणोत्थेव तरंगलेखा
पद्मान्तरं मानसराजहंसीम् ॥

अन्वयः AI वेत्रग्रहणे नियुक्ता सा एव तां राजसुतां राजान्तरं निनाय, समीरणोत्था तरङ्गलेखा मानसराजहंसीं पद्मान्तरम् इव ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) तामिति॥ सैव नान्या। चित्तज्ञत्वादिति भावः। वेत्रग्रहणे नियुक्ता दौवारिकी सुनन्दा तां राजसुतां राजान्तरमन्यराजानं निनाय। नयतिर्द्विकर्मकः। कथमिव? समीरणोत्था वातोत्पन्ना तरंगलेखोर्मिपङ्क्तिर्मानसे सरसि या राजहंसी तां पद्मान्तरमिव ॥
Summary AI That same Sunanda, appointed to the duty of holding the staff, led the princess to another king, just as a ripple caused by the wind leads a royal swan from the Manasa lake to another lotus.
सारांश AI इसके बाद सुनंदा राजकुमारी इंदुमती को दूसरे राजा के पास ले गई, जैसे वायु के वेग से उत्पन्न लहर मानसरोवर की राजहंसी को एक कमल से दूसरे कमल की ओर ले जाती है।
पदच्छेदः AI
ताम्तद् (२.१) her
सातद् (१.१) she
एवएव the very same
वेत्रग्रहणेवेत्रग्रहण (७.१) in the duty of holding the staff
नियुक्तानियुक्त (नि√युज्+क्त, १.१) appointed
राजान्तरम्राजान्तर (२.१) to another king
राजसुताम्राजसुता (२.१) the king's daughter
निनायनिनाय (√नी कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) led
समीरणोत्थासमीरणउत्था (१.१) arisen from the wind
इवइव like
तरंगलेखातरङ्गलेखा (१.१) a ripple
पद्मान्तरम्पद्मान्तर (२.१) to another lotus
मानसराजहंसीम्मानस–राजहंसी (२.१) a royal swan of the Manasa lake
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
तां सै वे त्र ग्र णे नि यु क्ता
रा जा न्त रं रा सु तां नि ना
मी णो त्थे रं ले खा
द्मा न्त रं मा रा हं सीम्
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