अनेन पर्यासयताश्रुबिन्दू-
न्मुक्ताफलस्थूलतमान्स्तनेषु ।
प्रत्यर्पिताः शत्रुविलासिनीना-
मुन्मुच्य सूत्रेण विनैव हाराः ॥
अनेन पर्यासयताश्रुबिन्दू-
न्मुक्ताफलस्थूलतमान्स्तनेषु ।
प्रत्यर्पिताः शत्रुविलासिनीना-
मुन्मुच्य सूत्रेण विनैव हाराः ॥
न्मुक्ताफलस्थूलतमान्स्तनेषु ।
प्रत्यर्पिताः शत्रुविलासिनीना-
मुन्मुच्य सूत्रेण विनैव हाराः ॥
अन्वयः
AI
अनेन शत्रुविलासिनीनां स्तनेषु मुक्ताफलस्थूलतमान् अश्रुबिन्दून् पर्यासयता, सूत्रेण विना एव उन्मुच्य हाराः प्रत्यर्पिताः इव ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अनेनेति॥ शत्रुविलासिनीनां स्तनेषु मुक्ताफलस्थूलतमानश्रुबिन्दून्।
अस्रमश्रुणि शोणिते इति विश्वः। प्रयासयता प्रस्तारयता। भर्तृवधादिति भावः। अनेनाङ्गनाथेनोन्मुच्याक्षिप्य सूत्रेण विना हारा एव प्रत्यर्पिताः। अविच्छइन्नाश्रुबिन्दुप्रवर्तनादुत्सूत्रहारार्पणमेव कृतमिवेत्युत्प्रेक्षा गम्यते ॥
Summary
AI
"By causing teardrops, as large as the biggest pearls, to fall upon the breasts of his enemies' wives, it is as if he returns their necklaces to them, but unstrung and without a thread."
सारांश
AI
इन्होंने युद्ध में शत्रुओं को मारकर उनकी स्त्रियों की आंखों से मोतियों जैसे बड़े आंसू गिराए, मानो उनके स्तनों पर बिना धागे के ही फिर से मोतियों के हार सजा दिए हों।
पदच्छेदः
AI
| अनेन | इदम् (३.१) | by him |
| पर्यासयता | पर्यासयत् (परि√अस्+णिच्+शतृ, ३.१) | causing to fall down |
| अश्रुबिन्दून् | अश्रु–बिन्दु (२.३) | teardrops |
| मुक्ताफलस्थूलतमान् | मुक्ताफल–स्थूलतम (२.३) | as large as the biggest pearls |
| स्तनेषु | स्तन (७.३) | on the breasts |
| प्रत्यर्पिताः | प्रत्यर्पित (प्रति√ऋ+णिच्+क्त, १.३) | returned |
| शत्रुविलासिनीनाम् | शत्रु–विलासिनी (६.३) | of the wives of his enemies |
| उन्मुच्य | उन्मुच्य (उद्√मुच्+ल्यप्) | having been taken off |
| सूत्रेण | सूत्र (३.१) | with the thread |
| विना | विना | without |
| एव | एव | even |
| हाराः | हार (१.३) | necklaces |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ने | न | प | र्या | स | य | ता | श्रु | बि | न्दू |
| न्मु | क्ता | फ | ल | स्थू | ल | त | मा | न्स्त | ने | षु |
| प्र | त्य | र्पि | ताः | श | त्रु | वि | ला | सि | नी | ना |
| मु | न्मु | च्य | सू | त्रे | ण | वि | नै | व | हा | राः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.