निसर्गभिन्नास्पदमेकसंस्थ-
मस्मिन्द्वयं श्रीश्च सरस्वती च ।
कान्त्या गिरा सूनृतया च योग्या
त्वमेव कल्याणि तयोस्तृतीया ॥
निसर्गभिन्नास्पदमेकसंस्थ-
मस्मिन्द्वयं श्रीश्च सरस्वती च ।
कान्त्या गिरा सूनृतया च योग्या
त्वमेव कल्याणि तयोस्तृतीया ॥
मस्मिन्द्वयं श्रीश्च सरस्वती च ।
कान्त्या गिरा सूनृतया च योग्या
त्वमेव कल्याणि तयोस्तृतीया ॥
अन्वयः
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कल्याणि! अस्मिन् निसर्गभिन्नास्पदं श्रीः च सरस्वती च द्वयम् एकसंस्थम् अस्ति । कान्त्या गिरा सूनृतया च योग्या त्वम् एव तयोः तृतीया भविष्यसि ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
निसर्गेति॥ निसर्गतः स्वभावतो भिन्नास्पदं भिन्नाश्रयम्। सहावस्थानविरोधीत्यर्थः। श्रीश्च सरस्वती चेति द्वयमस्मिन्नङ्गनाथ एकत्र संस्था स्थितिर्यस्य तदेकसंस्थम्। उभयमिह संगतमित्यर्थः। हे कल्याणि!
बाह्वादिभ्यश्च (अष्टाध्यायी ४.१.९६ ) इति ङीप्। कान्त्या सूनृतया सत्यप्रियया गिरा च योग्या संसर्गार्हा त्वमेव तयोः श्रीसरस्वत्यो स्तृतीया। समानगुणयोर्युवयोर्दांपत्यं युज्यत एवेति भावः। दक्षिणनायकत्वं चास्य ध्वन्यते-तदुक्तम्-तुल्योऽनेकत्र दक्षिणः इति ॥
Summary
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"O auspicious one! In him, both Shri (wealth) and Saraswati (learning), which naturally reside in different places, are found together. With your beauty, speech, and truthfulness, you are worthy to be the third, joining them."
सारांश
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लक्ष्मी और सरस्वती, जो प्रायः अलग रहती हैं, वे इन राजा में एक साथ निवास करती हैं। हे कल्याणी! अपनी सुंदरता और मधुर वाणी से तुम ही इन दोनों के साथ तीसरी होने के योग्य हो।
पदच्छेदः
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| निसर्गभिन्नास्पदम् | निसर्ग–भिन्न–आस्पद (१.१) | naturally having different abodes |
| एकसंस्थम् | एक–संस्थ (१.१) | residing in one place |
| अस्मिन् | इदम् (७.१) | in him |
| द्वयम् | द्वय (१.१) | a pair |
| श्रीः | श्री (१.१) | Shri (Goddess of wealth) |
| च | च | and |
| सरस्वती | सरस्वती (१.१) | Saraswati (Goddess of learning) |
| च | च | and |
| कान्त्या | कान्ति (३.१) | with beauty |
| गिरा | गिर् (३.१) | with speech |
| सूनृतया | सूनृता (३.१) | with truthful and pleasant speech |
| च | च | and |
| योग्या | योग्य (१.१) | suitable |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| एव | एव | indeed |
| कल्याणि | कल्याणी (८.१) | O auspicious one |
| तयोः | तद् (६.२) | of those two |
| तृतीया | तृतीया (१.१) | the third |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | स | र्ग | भि | न्ना | स्प | द | मे | क | सं | स्थ |
| म | स्मि | न्द्व | यं | श्री | श्च | स | र | स्व | ती | च |
| का | न्त्या | गि | रा | सू | नृ | त | या | च | यो | ग्या |
| त्व | मे | व | क | ल्या | णि | त | यो | स्तृ | ती | या |
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